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लखनऊ विश्वविद्यालय : प्रश्नपत्रों की चार सीरीज होने का दावा, पर छापी सिर्फ एक, सवाल उठे तो दिया गोपनीयता का हवाला

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लविवि ने दावा प्रश्नपत्रों के चार सिरीज होने का किया ल‌ेकिन एक ही सिरीज का पेपर छापा गया।
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लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय की सेमेस्टर परीक्षाएं चल रही हैं। बहुविकल्पीय सवाल आधारित प्रणाली में नकल की आशंका कम करने के लिए अलग-अलग सीरीज के प्रश्नपत्र छापे जाते हैं, लेकिन चार सीरीज की प्रश्नपत्र के दावे के बावजूद सिर्फ एक ही छापी गई है। प्रश्नपत्र के ऊपरी पृष्ठ पर ए, बी, सी और डी सिरीज नंबर लिखा है, पर सभी के भीतर प्रश्नों की एक ही सीरीज है।
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इस मामले को लेकर विद्यार्थियों के साथ ही शिक्षक भी सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि बात जब चार सीरीज के प्रश्नपत्र से परीक्षा कराने की है तो फिर एक ही प्रकार की बुकलेट क्यों रखी गई है। लविवि प्रशासन इसको गोपनीय बताकर कुछ भी कहने से बच रहा है।
दरअसल, लखनऊ विश्वविद्यालय ने कोरोना महामारी की वजह से इस साल विषम सेमेस्टर की परीक्षा भी ओएमआर पर बहुविकल्पीय सवाल आधारित प्रणाली पर कराई जा रही है। अभी तक लविवि में यह परीक्षा लिखित प्रणाली पर होती थी। बहुविकल्पीय सवाल आधारित प्रणाली में एक-एक नंबर के सवाल पूछे जाते हैं।
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अलग-अलग सीरीज से नकल पर लगती है लगाम
अलग-अलग सिरीज की बुकलेट में सभी प्रश्न वही होते हैं, लेकिन उनका क्रम बदल जाता है। ऐसे में परीक्षार्थी प्रश्नपत्र देखकर सिर्फ उसकी संख्या के आधार पर आपस में बातचीत नहीं कर पाते हैं। लविवि ने अपनी सेमेस्टर परीक्षा में इसको देखते हुए चार सीरीज से प्रश्नपत्र कराने की बात कही थी। प्रश्नपत्रों के कवर पृष्ठ पर भी इसका ध्यान दिया गया है लेकिन कवर खोलते ही सभी प्रश्नों का एक ही क्रम है।
बड़ा सवाल : भुगतान सिर्फ एक सीरीज का हुआ है या चार का
दरअसल, चार सिरीज के प्रश्नपत्र बनाने में ज्यादा समय लगता है और उनके लिए भुगतान भी ज्यादा होता है। एक ही सीरीज के प्रश्नपत्र होने पर अपेक्षाकृत कम भुगतान करना पड़ेगा। अभी यह साफ नहीं हुआ है कि प्रश्नपत्र के लिए चार सीरीज का भुगतान हो रहा है या एक सिरीज का, लेकिन कवर पृष्ठ पर चार नंबर लिखकर केवल एक ही सिरीज होने से लविवि की मंशा पर सवाल जरूर उठ रहे हैं।
परीक्षार्थियों को नहीं दिया जा रहा प्रश्नपत्र
विश्वविद्यालय में सेमेस्टर परीक्षा चल रही है। सिर्फ लखनऊ विश्वविद्यालय ही ऐसा संस्थान है जो उत्तर पुस्तिका के साथ ही पेपर भी जमा करा लेता है। सेमेस्टर परीक्षा ही नहीं सभी प्रवेश परीक्षा में भी लविवि यही प्रक्रिया अपनाता है। ऐसे में अगर प्रश्नपत्र में कोई गड़बड़ी भी होती है तो फिर वह सामने नहीं आ पाती है। आंसर की जारी होने की सूरत में भी विद्यार्थी कुछ नहीं कर पाते हैं, क्योंकि उन्हें पता ही नहीं होता है कि जो आंसर की जारी हुई है, उसका प्रश्न क्या था।
गोपनीय होते हैं परीक्षा संबंधी मामले
इस मामले पर विश्वविद्यालय के प्रवक्ता डॉ. दुर्गेश श्रीवास्तव का कहना है कि परीक्षा संबंधी मामले गोपनीय होते हैं। उनके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। परीक्षा में प्रश्नपत्र न देने का फैसला परीक्षा समिति ने लिया है। उसी के फैसले का पालन किया जा रहा है।
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