मुसाहिबगंज स्थित जमीअतुल तबलीग में आयोजित जश्ने मौलूदे काबा में खिताब करते मौलाना जाफर अब्बास
लखनऊ। पैगंबर मोहम्मद साहब के दामाद अमीर उल मोमेनीन हजरत अली की विलादत के सिलसिले में मंगलवार को महफिल का आयोजन किया गया। उलमा ने हजरत अली की सीरत व फजीलत पर रोशनी डाली। शायरों ने अपने कलाम के जरिये नजराना ए अकीदत पेश की।
हौजा इल्मिया जमीएतुल तब्लीग की ओर से मुसाहिबगंज स्थित मदरसा जामियतुत तब्लीग में जश्ने मौलूदे काबा महफिल का आगाज मौलाना मोहम्मद इब्राहीम ने कुरान की तिलावत से किया। महफिल की अध्यक्षता करते हुए मौलाना मिर्जा एजाज अतहर ने कहा कि मोमिन की पहचान हजरत अली से मोहब्बत है और मुनाफिक की पहचान हजरत से दुश्मनी है। मौलाना मिर्जा जाफर अब्बास ने कहा कि हजरत अली ने अल्लाह के रसूल सल. की आगोश और मोहब्बत में तरबियत पाई। हजरत अली अपने समय में सबसे बहादुर माने जाते थे। हजरत अली को झूठ से नफरत थी। हजरत अली फरमाते हैं कि ईमान की सबसे बड़ी पहचान है कि जहां पर सच बोलने से नुकसान हो रहा हो वहां पर भी सच बोलो, किसी भी हालत में झूठ नही बोलो। महफिल का संचालन किरतास कर्बलाई ने किया। इस मौके पर शायर नय्यर जलालपुरी, बेताब हल्लौरी, वकार सुलतानपुरी, मीसम गोपालपुरवी, शबाब जलालपुरी, नासिर दोसानी, मुनाजिर अख्तर, समर हैदर जैदी आदि शायरों ने हजरत अली की शान में कलाम पेश किए।