लखनऊ। राम काज कीन्हे बिनु मोहि कहां विश्राम... इस चौपाई को चरितार्थ किया है आलमबाग के गीतापल्ली निवासी किसान व मूर्तिकार शैलेंद्र कुमार ने। उन्होंने 280 किलो कालानमक चावल से प्रभु राम की 10 फीट ऊंची और चार फीट चौड़ी प्रतिमा बनाई है।
इसे पूरा करने में उन्हें तीन महीने का समय लगा, जिसमें भाई ने भी उनका साथ दिया। दस क्विंटल वजनी प्रतिमा को बनाने के लिए उन्होंने मित्र शिवशंकर पटेल से आर्थिक मदद भी ली। फिलहाल प्रतिमा आशियाना के सेक्टर एम में रखी गई है।
शैलेंद्र बताते हैं कि अयोध्या में रामलला के दर्शन के बाद उनके मन में भगवान श्रीराम की प्रतिमा बनाने का विचार आया। सीमेंट से प्रभु की प्रतिमा को आकार दिया, फिर उस पर चावल चिपकाकर निर्माण पूरा किया। प्रतिमा कहां स्थापित की जाएगी इस पर विचार जारी है। उनकी इच्छा है कि महाकुंभ में संगम के पवित्र जल से प्रतिमा का जलाभिषेक किया जाए।