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यह अल्फाज हैं सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा के। अमेठी से किशोरी लाल शर्मा व रायबरेली से राहुल गांधी के नामांकन के बाद पहली बार वाड्रा ने सोशल मीडिया पर अपने दिल की बात साझा की है। अब इसके अलग-अलग निहितार्थ निकाले जा रहे हैं।
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अमेठी के लिए उनकी बात खासा मायने रखती है। वजह भी साफ है। असल में अमेठी संसदीय सीट से कांग्रेस में जब टिकट को लेकर उठापटक चल रही थी, उस वक्त राबर्ट वाड्रा का बयान सामने आया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेठी के लोग चाहते हैं कि वह चुनाव लड़ें। इसके बाद उनके कई और बयान आए। इसके बाद भी कांग्रेस ने उनके नाम को लेकर कोई विचार नहीं किया।
अब जब कांग्रेस से किशोरी लाल शर्मा चुनावी समर में हैं तो राबर्ट वाड्रा के दिल की बात को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। हालांकि राबर्ट वाड्रा ने जब चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी, उस वक्त कुछ कांग्रेसी नेताओं ने सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी किया था। स्थानीय स्तर पर कांग्रेस नेताओं ने कोई खास टिप्पणी नहीं की थी।
राजनीतिक परिदृश्य पर नजर रखने वाले एलपी द्विवेदी कहते हैं कि राबर्ट वाड्रा प्रियंका के साथ आते थे। 1999 के चुनाव के प्रबंधन में भी वह रहे। शायद इसीलिए उन्होंने इच्छा जाहिर की थी। पड़ोसी जिले रायबरेली में रॉबर्ट ने राहुल गांधी के साथ नामांकन में हिस्सा लिया था, लेकिन अमेठी नहीं आए।