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उत्तर प्रदेश में अलग तरह से होगी लोकायुक्त की नियुक्ति

Sat, 18 Jul 2015 09:57 AM IST
अनिल श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
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मनमाफिक नियुक्ति में पेंच फंस जाने के बाद राज्य सरकार ने लोकायुक्त चयन में हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की भूमिका ही खत्म कर दी है। लोकायुक्त की नियुक्ति अब मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय कमेटी करेगी। इसके लिए यूपी लोकायुक्त तथा उप लोकायुक्त अधिनियम 1975 में संशोधन के प्रस्ताव को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दे दी गई है।
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सरकार विधानमंडल के मानसून सत्र में संशोधन विधेयक पेश करेगी। विधेयक पास होते ही सीएम की अध्यक्षता वाली कमेटी को लोकायुक्त चयन का अधिकार मिल जाएगा। सरकार के इस फैसले से लोकायुक्त चयन में चीफ जस्टिस की कोई भूमिका नहीं रह जाएगी।

यह सारी कवायद नए लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख को देखते हुए बेहद गोपनीय ढंग से की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि केरल समेत कई राज्यों में लोकायुक्त चयन प्रक्रिया का अध्ययन कराने के बाद संशोधन का ड्राफ्ट तैयार कराया गया है। सरकार के भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार इस संशोधन प्रस्ताव को हाल ही में बाई सर्कुलेशन कैबिनेट की मंजूरी मिली है।
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चीफ जस्टिस ने नाम पर असहमति जताई तो सरकार ने लिया फैसला

मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष से सलाह के बाद फरवरी में लोकायुक्त पद के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस रवींद्र सिंह यादव का नाम चीफ जस्टिस के पास भेजा था। चीफ जस्टिस ने उनके  नामपर असहमति जता दी तो सरकार चयन प्रक्रिया में ही बदलाव करने की तैयारी में जुट गई थी। अंतत: दूसरे राज्यों की तर्ज पर यहां भी चयन में चीफ जस्टिस की भूमिका ही खत्म करने का फैसला कर लिया।


यूपी लोकायुक्त तथा उप लोकायुक्त अधिनियम 1975 की धारा 3 (क) के अनुसार मुख्यमंत्री और नेता विरोधी दल की चयन समिति लोकायुक्त का नाम तय करके उसे परामर्श के लिए हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के पास भेजती है। उनकी सहमति के बाद राज्यपाल लोकायुक्त की नियुक्ति करते हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया था नोटिस

लोकायुक्त की नियुक्ति मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष, विधानसभा अध्यक्ष, सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री तथा मुख्य न्यायाधीश द्वारा नामित उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की समिति करेगी।

एक साल से ज्यादा वक्त बीत जाने के बाद भी नए लोकायुक्त की नियुक्ति न होने पर हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया था।

बृहस्पतिवार को भी इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य सचिव से पूछा है कि पिछले साल अप्रैल में दिए गए आदेश के बाद अभी तक क्या कार्यवाही की गई है?

इसके लिए बुधवार तक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया गया है। अब सरकार, लोकायुक्त के चयन के लिए हुई बैठकों, उसके कार्यवृत्त और चीफ जस्टिस के साथ हुए पत्राचार का पूरा ब्यौरा तैयार करा रही है।
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