मुख्यमंत्री ने कहा कि जो सरकारी बंगला छोड़ते वक्त वहां की टोंटी तक उखाड़ ले जाता हो, जो अपने पिता तक को अपमानित करता हो, जिसके राज में गुंडों की पौ-बारह हो, वह ऐसी ही भाषा तो बोलेगा। जिन्होंने अपराधियों को खुले तौर पर दंगा करने की छूट दी हो। यह भाषा दरअसल हताशा और निराशा को दिखाता है कि बाजी हारने का दर्द क्या होता है? यह स्पष्ट हो गया कि जनता उन्हें नकार चुकी है।