माफिया पर सख्त कार्रवाई करने और उसका चुनाव में जमकर प्रचार करने के बावजूद भाजपा को निराशा का सामना करना पड़ गया। जिन सीटों पर माफिया का दशकों से प्रभाव रहा, वहां पर सपा ने फतह हासिल कर भाजपा नेताओं के दावों की हवा निकाल दी। चुनाव प्रचार के दौरान माफिया पर सख्ती और बुलडोजर पॉलिसी को जनता ने सिरे से नकार दिया।
बता दें कि पूर्वांचल में माफिया मुख्तार अंसारी और उनके परिवार का असर गाजीपुर और आसपास की सीटों पर दशकों से रहा है। गाजीपुर में मुख्तार के भाई अफजाल अंसारी ने दोबारा चुनाव जीत लिया है। इससे संदेश गया कि मुख्तार की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु को लेकर जनता के मन में आक्रोश है। गाजीपुर की नजदीकी घोसी सीट पर भी सपा के राजीव राय ने जीत हासिल की है।
वहीं, इलाहाबाद को माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ के खौफ से मुक्त कराने की राज्य सरकार की कवायद भी चुनाव में रंग नहीं दिखा सकी। यह सीट कांग्रेस के खाते में चली गयी, जहां उज्जवल रमण सिंह ने चुनाव जीता है। कानपुर में दुर्दांत अपराधी विकास दुबे की पुलिस एनकाउंटर में मौत के बावजूद भाजपा को जीत के लिए खासा संघर्ष करना पड़ा। कानपुर में रमेश अवस्थी को बेहद कम अंतर से जीत हासिल हुई है।