उत्तर प्रदेश के दो जिलों के नाम भले ही बदल गए हों लेकिन, चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में अभी पुराने नाम ही चल रहे हैं। दरअसल योगी सरकार ने प्रदेश के दो बड़े जिलों इलाहाबाद का नाम प्रयागराज और फैजाबाद का नाम अयोध्या कर दिया था। लेकिन, चुनाव आयोग ने इन नामों को फिलहाल स्वीकार नहीं किया है।
विज्ञापन
चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में लोकसभा संसदीय क्षेत्र संख्या 52 पर इलाहाबाद और 54 पर फैजाबाद ही दर्ज है। ऐसा नहीं है कि यह पहली बार हुआ है जब जिलों के बदले गए नाम को आयोग के रिकॉर्ड में शामिल न किया गया हो। इससे पहले मायावती ने कई जिलों के नाम बदले थे।
उसमें भदोही का नाम संत रविदास नगर, अमरोहा का नाम ज्योतिबा फूले नगर, कानपुर देहात का नाम महामाया नगर और अमेठी का नाम छत्रपति साहू जी महाराज नगर किया था, लेकिन आयोग के रिकॉर्ड में इन नामों को शामिल नहीं किया गया।
विज्ञापन
हालांकि आयोग के एक अधिकारी का कहना है कि लोकसभा सीटों का नाम जिले के नाम पर नहीं होता। यूपी में कम से कम 19 सीट ऐसी हैं जो जिले के मूल नाम से अलग हैं। इसमें इलाहाबाद और फैजाबाद के अलावा भदोही, अकबरपुर, मिश्रिख, मछलीशहर, मोहनलालगंज, कैराना, फतेहपुर सीकरी, नगीना, आंवला, धौरहरा, कैसरगंज, फूलपुर, लालगंज, बांसगांव, घोसी, सलेमपुर और राबर्ट्सगंज सीटें ऐसी हैं, जिनका नाम जिलों से अलग है।
ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें पांच या उससे अधिक विधानसभा क्षेत्र हैं। जबकि कुछ जिले ऐसे हैं जहां पांच से कम विधानसभा क्षेत्र हैं। ऐसे में स्वाभाविक है कि जो बड़े जिले हैं उसमें दो संसदीय सीटें लोकसभा की हैं। इसमें लखनऊ में लखनऊ और मोहनलालगंज, जौनपुर में जौनपुर और मछलीशहर, प्रयागराज में इलाहाबाद और फूलपुर, आजमगढ़ में आजमगढ़ और लालगंज, आगरा में आगरा और फतेहपुर सीकरी और सीतापुर में सीतापुर और मिश्रिख जैसी सीटें हैं।
जबकि कुछ सीटें ऐसी हैं जो दो जिलों की अलग-अलग विधानसभा सीटों को मिलाकर तैयार की गई हैं। दो या उससे अधिक जिलों की विधानसभा सीटों को मिलाकर बनी लोकसभा सीटों में शामली की तीन और सहारनपुर जिले की दो विधानसभा सीटों को मिलाकर कैराना लोकसभा सीट है।
गोंडा की तीन और बहराइच की दो विधानसभा सीटें मिलाकर कैसरगंज सीट है। बरेली की चार और बदायूं की एक सीट मिलाकर आंवला लोकसभा सीट है। प्रयागराज की दो और संतरविदास नगर की तीन सीटें मिलाकर भदोही सीट है।
यूपी में कुल 75 जिले हैं और इन 75 जिलों में कुल लोकसभा की सीटों की संख्या 80 है। रोचक तथ्य यह है कि 75 में से 61 जिलों के नाम पर लोकसभा क्षेत्र का नाम है। 14 जिले ऐसे हैं जिनके नाम पर लोकसभा सीट नहीं हैं। इसमें प्रयागराज और अयोध्या के अलावा शामली, कानपुर देहात, सिद्घार्थनगर, मऊ, संत रविदास नगर, ज्योतिबा फूले नगर, बलरामपुर, औरय्या, कासगंज, चित्रकूट, महोबा और ललितपुर जिले के नाम पर कोई लोकसभा सीट नहीं है।