लोकसभा चुनाव के पहले तीन चरण में यूपी के एक भी प्रत्याशी ने अपने आपराधिक रिकॉर्ड का ब्यौरा न तो किसी भी प्रमुख समाचार पत्र में प्रकाशित कराया और न ही किसी चैनल पर प्रसारित कराया।
यह दावा एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म के यूपी प्रमुख संजय सिंह ने किया है। उन्होंने कहा, यह चुनाव आयोग के आदेशों का सरासर उल्लंघन है। इसलिए सातों चरण में आयोग के निर्धारित अवधि खत्म होने के बाद वह इस मुद्दे को लेकर कोर्ट जाएंगे।
संजय सिंह का कहना है कि चुनाव आयोग व सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना न करने वाले उम्मीदवारों को भविष्य में किसी भी चुनाव में हिस्सा लेने पर रोक लगा देनी चाहिए। यह चिंता का विषय है कि उम्मीदवार व राजनीतिक दल दोनों की अवहेलना कर रहे हैं। आयोग को इस मामले में सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
जबकि उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. ब्रह्मदेव राम तिवारी का कहते हैं, उम्मीदवारों से उसके आपराधिक रिकॉर्ड का ब्यौरा अखबारों में प्रकाशित व न्यूज चैनलों पर प्रसारित करने की जिम्मेदारी जिला निर्वाचन अधिकारियों की है।
उन्हें इसका रिकॉर्ड भी रखने के निर्देश दिए गए हैं। जिन उम्मीदवारों ने आयोग के निर्देशों का पालन नहीं किया है, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई होगी, यह केंद्रीय चुनाव आयोग तय करेगा।
‘जुगाड़’ से हो रही चुनाव आयोग के आदेशों की खानापूरी
सूत्रों का कहना है कि चुनाव आयोग की कार्रवाई से बचने के लिए प्रत्याशी जुगाड़ तंत्र का सहारा ले रहे हैं। यानी ऐसे अखबारों का सहारा ले रहे हैं, जिनका वास्तविक प्रकाशन संख्या बेहद कम है। जबकि आयोग का निर्देश था कि प्रमुख अखबारों में इसका प्रकाशन कराया जाए। अब देखना यह है कि आयोग बेहद कम प्रसार संख्या वाले अखबारों में दिया गया विज्ञापन मानता है या नहीं।