कांग्रेस के कद्दावर नेता व प्रदेश के पूर्व कार्यवाहक मुख्यमंत्री डॉ. अम्मार रिजवी ने मंगलवार को पार्टी नेतृत्व पर दल-बदलुओं को तरजीह व कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय व प्रांतीय संगठन के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। हालांकि उन्होंने अभी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र नहीं दिया है। उधर डॉ. रिजवी के समर्थन में जिले में पार्टी के दर्जनों पदाधिकारियों व करीब ढाई सौ कार्यकर्ताओं ने पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया है।
महमूदाबाद स्थित अपने आवास रम्माल हाउस पर खबरनवीसों से बातचीत करते हुए डॉ. रिजवी ने कहा कि 1966 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी उन्हें कांग्रेस में लेकर आई थीं। वर्ष 1970 में प्रांतीय कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी का सदस्य होने के बाद वर्ष 1972 में वह अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य निर्वाचित हुए। पिछले 53 साल से पार्टी के प्रति वह हर तरह से निष्ठावान रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब कांग्रेस नेतृत्व कार्यकर्ताओं की लगातार उपेक्षा कर रहा है।
2014 के लोकसभा चुनाव में नेतृत्व ने कार्यकर्ताओं की भावना के विपरीत वैशाली अली को सीतापुर प्रत्याशी बना दिया था। नतीजा, कांग्रेस प्रत्याशी को करीब 26 हजार वोट ही मिले थे। इस बार भी किसी कांग्रेसी कार्यकर्ता को लोकसभा प्रत्याशी न बनाकर दल-बदलकर आने वाले वाले को टिकट दिया गया है।
कांग्रेस नेतृत्व ने जो ऑब्जर्वर जिले में भेजे उन्हें पहले निर्देश दे दिए गये हैं कि उन्हें क्या कहना और करना है। डॉ. रिजवी ने कहा पार्टी की नीतियां कार्यकर्ता विरोधी हो चुकी हैं। इसलिए कार्यकर्ताओं के मान-सम्मान को बचाने के लिए मुझे यह निर्णय लेना पड़ रहा है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में शुमार डॉ. अम्मार रिजवी द्वारा कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा दिए जाने के बाद उनके समर्थकों ने भी इस्तीफों की बौछार कर दी। डॉ. रिजवी के साथ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य व जिला महामंत्री इरफान मंसूरी, पीसीसी सदस्य अनूप सिंह, पूर्व पीसीसी सदस्य बृजेंद्र सहाय, सभासद राशिद कामरीन, जिला मंत्री मंसूर अली, ब्लॉक पहला अध्यक्ष डॉ. निजामुद्दीन आजाद, रामपुर मथुरा ब्लॉक अध्यक्ष डॉ. जकी अहमद, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के जिला उपाध्यक्ष अय्यूब अहमद डम्पी, जिला सचिव रामकिशुन रावत, अल्पसंख्यक जिला सेक्रेट्री नसरुद्दीन अंसारी, महमूदाबाद अल्प संख्यक अध्यक्ष बाबू खां के साथ गार्गी महराज, सीतांश शुक्ल सहित करीब ढाई सौ कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस पार्टी का दामन छोड़ दिया है।
भाजपा में जाने की होती रही चर्चा
डॉ. अम्मार रिजवी के कांग्रेस इस्तीफे के बाद अंदर खाने कुछ कार्यकर्ताओं ने इसे देर से लिया गया सही निर्णय करार दिया। इसके साथ ही उनके समर्थक भविष्य में उनके भाजपा में शामिल होने की चर्चा करते भी सुने गये।