भाजपा ने पिछड़े वर्ग के अपने चेहरे केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में पिछड़ी जातियों के सम्मेलनों का सिलसिला चलाया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कई सम्मेलनों में मौजूद रहकर यह संदेश देने का प्रयास किया कि सरकार को इन जातियों के सम्मान, स्वाभिमान व सुविधाओं का ख्याल है। अनुसूचित जातियों के भी कई सम्मेलन करके उन्हें भाजपा के साथ जोड़ने की कोशिश की गई। प्रत्याशी बनाने में भी सामाजिक समीकरणों के संतुलन पर ध्यान रखा गया। अगड़ों और पिछड़ों के लगभग बराबर-बराबर प्रत्याशी बनाए गए। सुरक्षित सीटों पर से दो टिकट दिए गए ताकि इनकी पूरी तरह अनदेखी का संदेश न जाए लेकिन दूसरी तरफ 6 पासी, 3 खटिक और अन्य बिरादरी के चेहरों को उम्मीदवार बनाकर अनुसूचित जाति के मतदाताओं के बड़े हिस्से को भाजपा के साथ जोड़ने की कोशिश की गई। पिछड़ों में भी गैर यादव रणनीति के तहत सिर्फ एक जगह आजमगढ़ में यादव को टिकट दिया गया। इसके अलावा 29 सीटों पर अन्य पिछड़ी जातियों के प्रत्याशी उतारे गए।
सरोकारों के समीकरण सजाए
अयोध्या में दिवाली, मथुरा-वृंदावन में होली, काशी में देव दीपावली, अयोध्या में सरयू आरती, चित्रकूट में मंदाकिनी की आरती, शक्तिपीठों को 24 घंटे बिजली, नैमिषारण्य और विंध्याचल के विकास के साथ शुक्रताल को लेकर काम, व्रज विकास परिषद का गठन, अयोध्या और मथुरा-वृंदावन को नगर निगम का दर्जा, थानों में जन्माष्टमी, कांवड़ियों पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा और कुंभ के सहारे सरोकारों के प्रति केंद्र और राज्य सरकार के समर्पण और आस्था का संदेश दिया गया। विंध्याचल और देवीपाटन मंदिर मेले को राज्य मेला का दर्जा, अयोध्या में भगवान राम की विशाल और सबसे ऊंची प्रतिमा की स्थापना की घोषणा, कैलाश मानसरोवर यात्रियों को एक लाख रुपये की सहायता तथा सिंधु दर्शन यात्रियों की अनुदान राशि दोगुनी करने की घोषणा से भी हिंदुत्व के रंग को गाढ़ा किया गया।
पुलवामा हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक जैसी कार्रवाई से भी राष्ट्रवाद के रंग को गाढ़ा किया गया। फैजाबाद और इलाहाबाद का नाम बदलकर क्रमश: अयोध्या व प्रयागराज करके सांस्कृतिक एजेंडे को धार दी गई। अनुसूचित जाति के लोगों के सरोकारों से जुड़े स्थलों और डॉ. भीमराव आंबेडकर से जुड़े स्थानों का विकास कराकर भी इस वर्ग को भाजपा के साथ जोड़ने की कोशिश हुई। पिछड़ों को जोड़ने के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग को सांविधानिक दर्जा तथा प्रयागराज कुंभ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सफाई कर्मचारियों के पैर धोने जैसे कामों से भी सरोकारों के समीकरण सजाए। उधर, प्रधानमंत्री मोदी ने केदारनाथ और बद्रीनाथ दर्शन से भी आस्था के सहारे सरोकारों को परवान चढ़ाया। इसके अलावा राम, कृष्ण, बौद्ध, जैन सर्किट जैसे कई कामों से समीकरण दुरुस्त करने की कोशिश की गई।