लोहिया संस्थान के डॉक्टर नहीं कर रहे वीआईपी ड्यूटी
संस्थान ने सीएमओ को पत्र लिखकर कहा -डॉक्टर अब स्वास्थ्य विभाग के हिस्सा नहीं
स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर लोहिया संस्थान से संबद्ध होने के बाद वीआईपी ड्यूटी और पोस्टमार्टम जैसे सरकारी काम करने को राजी नहीं हैं। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग और संस्थान के डॉक्टरों के बीच मामला फंस गया है। सीएमओ का कहना है कि अस्पताल और संस्थान के विलय के बाद भी संस्थान में 43 डॉक्टर तैनात हैं। इन डॉक्टरों से पहले की तरह पोस्टमार्टम व वीआईपी ड्यूटी में भेेजा जाए। वहीं संस्थान प्रशासन ने ड्यूटी कराने से मना कर दिया।
बीते पांच अक्तूबर को सीएमओ ने लोहिया संस्थान के निदेशक को पत्र लिखा। इसमें मुख्यमंत्री आवास, राजभवन, पोस्टमार्टम, वीआईपी व विभिन्न बोर्ड में डॉक्टरों की ड्यूटी लगाए जाने को कहा है। सरकारी कार्य में अस्पताल के डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जाए। लोहिया संस्थान ने सीएमओ को पत्र भेजकर साफ कहा कि पीजीआई, केजीएमयू व लोहिया संस्थान के डॉक्टर न तो पोस्टमार्टम करते हैं और न ही वीआईपी ड्यूटी। लोहिया अस्पताल का संस्थान में विलय होने से डॉक्टर स्वास्थ्य विभाग के नहीं रहे। ऐसे में इनकी ड्यूटी नहीं लगाई जा सकती है। पोस्टमार्टम की ड्यूटी सिर्फ सरकारी अस्पताल के डॉक्टर ही कर सकते हैं। हालांकि संस्थान के प्रवक्ता डॉ. विक्रम सिंह का कहना है कि ड्यूटी को मना नहीं किया गया है। कहा कि मरीजों का अधिक लोड है। डॉक्टरों की ड्यूटी सरकारी काम में लगने से मरीजों का इलाज प्रभावित होगा। इसे देखते हुए ड्यूटी न लगाए जाने की अपील की गई है।