इसे देखते हुए विभाग ने सेक्सुअल लाइफ में आ रही समस्याओं को लेकर अध्ययन संबंधी परियोजना तैयार की है। यह अध्ययन इंडियन साइकियाट्रिक सोसायटी के तहत होगा।
डॉ. त्रिपाठी बताते हैं कि लॉकडाउन में कई विकृतियां बढ़ी हैं। आशंका है कि भविष्य में मानसिक रोग से संबंधित मरीज बढ़ेंगे। ऐसे में इलाज को सही दिशा देने के लिए यह अध्ययन जरूरी है।
केजीएमयू के फैमिली काउंसलिंग एंड सेक्स व मैरिटल क्लीनिक के प्रभारी प्रोफेसर डॉ.आदर्श त्रिपाठी बताते हैं कि चिंता, भय व आशंका मानसिक तनाव की वजह बनती है।
वहीं, किसी भी तरह का मानसिक तनाव सेक्सुअल डिसआर्डर पैदा करता है। रेंडम सर्वे में शामिल लोगों में नौकरी को लेकर आशंका है। तमाम लोग अवसाद में है ऐसे में इन्हें मानसिक तनाव होना स्वाभाविक है। ऐसा होगा तो सेक्स लाइफ प्रभावित होना तय है।
देशभर के चिकित्सा विश्वविद्यालयों में साइकियाट्रिक विभाग हैं। ज्यादातर लोग इंडियन साइकियाट्रिक सोसायटी से जुड़े हैं। ऐसे में सोसायटी अपने स्तर पर देशभर के लोगों को अध्ययन में शामिल कर रही है।इसका फायदा होगा कि हर प्रदेश व भाषा के लोग शामिल हो सकेंगे और अध्ययन का दायरा बढ़ेगा।
यह होगा फायदा
अध्ययन से चिकित्सा विशेषज्ञ इलाज की तकनीक तय करेंगे। वहीं, इसकी रिपोर्ट से स्वास्थ्य मंत्रालय को अवगत कराया जाता है। फिर मंत्रालय की ओर से इलाज संबंधी गाइडलाइन में सोसायटी के मशविरे को तवज्जो दी जाती है।
तैयार किया जा रहा है प्रोजेक्ट
इंडियन साइकियाट्रिक सोसायटी के अध्यक्ष प्रो. पीके दलाल का कहना है कि कोविड 19 से समाज में कई बदलाव किए हैं। इसका सीधा असर लोगों की मानसिक स्थिति पर पड़ रहा है। यह भविष्य की बड़ी चुनौती है। इंडियन साइकियट्रिक सोसायटी से जुड़े चिकित्सा विशेषज्ञ देशभर में रेंडम सर्वे में जुटे हैं। सेक्सुअल हेल्थ की स्थितियों का आकलन करने को प्रोजेक्ट तैयार किया है।