लखनऊ। लखीमपुर खीरी की रहने वाली श्वेता कुमारी लखनऊ में रहकर मेडिकल की पढ़ाई करती हैं, लेकिन एक सप्ताह से जारी गैस सिलिंडर की किल्लत ने उनकी पढ़ाई प्रभावित कर दी है। वह घर लौटने के लिए मजबूर हैं। इसी तरह केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई कर रहे महेश कुमार एक निजी मेस में खाना खाते हैं, लेकिन गैस की किल्लत से मेन्यू के आधार पर मिलने वाले खाना बंद हो गया है। उन्हें चना, तहरी और खिचड़ी से ही गुजारा करना पड़ रहा है।
श्वेता और मुकेश की तरह राजधानी में 2000 से अधिक की संख्या में लखनऊ में रूम लेकर पढ़ाई और तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं को खाने पर परेशानी खड़ी हो गई है। पांच किलो वाले सिलिंडर की रिफलिंग नहीं हो पा रही है। जिस रूम में रह रहे हैं, मकान मालिक हीटर और इंडक्शन नहीं चलाने दे रहे हैं। अब छात्रों को पढ़ाई से ज्यादा खाने की चिंता सताने लगी है। उधर, अलग-अलग विश्वविद्यालय और कॉलेज के मेस बंद होने की वजह से परिसर के अंदर रहने वाले छात्र-छात्राएं भी परेशान हो रहे हैं।
350 छात्रों को खाने में नहीं मिलेगा रोटी, पूड़ी व समोसा
गैस सिलिंडर की किल्लत से केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की मेस का मेन्यू बदल दिया गया है। विश्वविद्यालय के निदेशक प्रो. सर्व नारायण झा ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। संस्थान के छात्रावास में 350 से अधिक छात्र रहते हैं। अब उन्हें खाने में खिचड़ी, तहरी और पोहा ही मिलेगा। रोटी, पूड़ी और समोसे पर अस्थायी रोक लगा दी गई है।
कस्तूरबा विद्यालय में गैस सिलिंडर की किल्लत, छात्राओं के खाने पर संकट
राजधानी के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में भी मुसीबत बढ़ गई है। विद्यालय प्रशासन ने बताया कि यहां रह रहीं 100 से अधिक छात्राओं के लिए एक सप्ताह से जैसे-तैसे खाने का बंदोबस्त किया जा रहा है। यदि ऐसी ही स्थिति रही तो आने वाले समय में छात्राओं को नियमित खाना नहीं मिलेगा।
गैस संकट।
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