चंद्रशेखर आजाद से मुलाकात करतीं प्रियंका गांधी वाड्रा।
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प्रियंका गांधी वाड्रा भले ही भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर से हुई मुलाकात का राजनीतिकरण करने से बच रही हों, लेकिन इसके राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। बसपा प्रमुख मायावती ने मंगलवार को कहा था कि उनकी पार्टी देश के किसी भी राज्य में कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं करेंगी। लिहाजा पश्चिमी यूपी में दलितों के नेता के रूप में उभरे चंद्रशेखर के आंदोलन पर मुहर लगाकर कांग्रेस ने 24 घंटे में बसपा को भी अहसास कराया है कि उसकी राजनीतिक हैसियत को कम न आंका जाए।
यूपी के दोनों प्रभारियों प्रियंका और ज्योतिरादित्य सिंधिया के मेरठ जाकर चंद्रशेखर का हाल जानना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पश्चिमी यूपी में चंद्रशेखर का चेहरा जिस तरह दलितों के नेता के रूप में उभरा है, उस पर कांग्रेस नेताओं ने अपनी मुहर लगा दी है।
कांग्रेस नेताओं को अभी इसे राजनीतिक रंग से देने से परहेज हो, लेकिन बसपा की तर्ज पर विस्तार ले रहे इस संगठन ने पश्चिमी यूपी की राजनीति में जो दखल बढ़ाई है, उससे अब इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकेगा।