जिला प्रशासन की ओर से मंगलवार को जारी अस्पतालों की सूची में क्रम संख्या 14 पर दिए बृजराज अस्पताल के पास एक वेंटिलेटर और ऑक्सीजन वाले 20 बेड बताए गए हैं। हालांकि, जब अस्पताल के दिए नंबर पर फोन किया गया तो बताया गया कि उनके पास ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं है। जो डॉक्टर व्यवस्था देख रहे हैं वे खुद आईसीयू में हैं, इसलिए भर्ती बंद है।
केस 2
क्रम संख्या नौ पर दिए औतार अस्पताल के सामने 60 बेड और तीन वेंटिलेटर बताए गए हैं। बेड की संख्या ज्यादा दिखाई दी तो लोगों ने फोन किया, पर उन्हें बताया गया कि यहां ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं है। ऑक्सीजन वाले सिर्फ आठ बेड और दो वेंटिलेटर हैं। व्यवस्था न होने से वे भर्ती नहीं कर सकते हैं।
केस 3
अमेठी अस्पताल में ऑक्सीजन वाले छह बेड हैं। अस्पताल भर्ती करने को तैयार है पर उसे ऑक्सीजन ही नहीं मिल पा रही है। इस कारण वह किसी को भी भर्ती करने से कतरा रहा है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है तो वह कैसे भर्ती करे।
केस 4
जिला प्रशासन की सूची में दिए गए ग्लोब मेडिकेयर, उर्मिला मेमोरियल, अपराजिता अस्पताल के नंबर पर कई बार फोन किया गया। पूरी-पूरी रिंग जाने के बावजूद यहां फोन नहीं उठे।
केस 5
कोविड अस्पताल के रूप में चिह्नित ग्लोब, उर्मिला, आयुष्मान जैसे कई अस्पतालों में ऑक्सीजन और वेंटिलेटर के बेड बताए गए हैं। हालांकि, इन अस्पतालों के जो नंबर जारी किए गए हैं वे बंद हैं।
राजधानी में कोरोना के तेजी से बढ़ते मामलों के बीच मंगलवार को जिला प्रशासन के 96 अस्पतालों को कोविड अस्पताल के रूप में अधिकृत करने की सूचना से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद जगी थी। अस्पतालों की सूची और उनके प्रभारी के नंबर जारी होने से लगा था कि उनका दर्द कुछ कम हो जाएगा। हालांकि, यह उम्मीद मंगलवार को ही टूटने लगी। इनमें से बमुश्किल 10 फीसदी अस्पतालों में ही इलाज के इंतजाम हैं।
लोगों ने जब दिए गए नंबरों पर फोन करना शुरू किया तो उनके घावों पर मरहम लगने के बजाय दर्द और बढ़ता महसूस हुआ। किसी अस्पताल में बताई गई संख्या में न तो बेड थे और न ऑक्सीजन की सुविधा। किसी अस्पताल ने बताया कि उनका स्टाफ खुद पॉजिटिव है, इसलिए भर्ती बंद है। इसके अलावा कई अस्पतालों के नंबर बराबर बंद मिले तो कुछ ने फोन उठाने तक की जहमत नहीं की।
कोरोना से जूझ रहे शहर में अस्पतालों में भर्ती नहीं हो पा रही है। दवाओं और ऑक्सीजन की उपलब्धता का भी हाल बुरा है। लोगों को भर्ती कराने के लिए निजी अस्पताल अधिकृत करने की जो सूचना जारी है उससे भी राहत नहीं मिल पा रही है। पिछली बार अधिकृत 17 अस्पतालों में से ज्यादातर में ऑक्सीजन की सुविधा ही नहीं थी। इसके बाद मंगलवार को फिर से 96 अस्पतालों की सूची जारी की गई। इसमें से इक्का-दुक्का को छोड़ ज्यादातर अस्पतालों में भर्ती करने की स्थिति नहीं हैं। कोई अस्पताल भर्ती लेना नहीं चाहता तो किसी के पास ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में मरीज पहले की ही तरह लाचार हैं।
बिना सूचना ही जारी कर दी सूची
जिला प्रशासन की ओर से जो सूची जारी की गई है उसमें से कई अस्पताल प्रशासन ने इसकी जानकारी होने से भी इंकार किया। उनका कहना था कि इसकी सूचना ही नहीं दी गई। माना जा रहा है कि आयुष्मान की सुविधा वाले अस्पतालों को कोविड के रूप में अधिकृत किया गया है। इनमें से कई अस्पतालों में इलाज का दावा जरूर किया जाता है पर उनकी स्थिति अच्छी नहीं है। कुछ का उपयोग तो केवल आयुष्मान कार्ड धारकों के इलाज और उसकी प्रतिपूर्ति लेने में ही किया जाता है।
सूची में पुराने अस्पतालों के भी नाम
जिला प्रशासन की ओर जारी 96 अस्पतालों की सूची में ऐसे नाम भी हैं जो पहले ही कोविड अस्पताल के रूप में चिह्नित हैं। एरा, अथर्व, अजंता जैसे करीब 10 अस्पताल पहले से कोविड अस्पताल के रूप में काम कर रहे हैं।