लखनऊ। जल्द से जल्द बाॅडी बनाने की चाह में जिम में भारी वजन उठाना स्लिप डिस्क और गंभीर पीठ दर्द की समस्या दे सकता है। इसलिए अभ्यास के माध्यम से धीरे-धीरे वजन उठाना चाहिए। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के ऑर्थोपेडिक सर्जरी विभाग की ओर से आयोजित स्पाइन कॉन्क्लेव-2025 में डाॅ. शाह वलीउल्लाह ने ये जानकारी दी।
डाॅ. शाह वलीउल्लाह ने बताया कि ओपीडी में काफी मरीज कमर दर्द के साथ आते हैं। इनमें से ज्यादातर मामले खराब जीवनशैली, मोटापा, जिम में ज्यादा वजन उठाने की वजह से होते हैं। प्रो. शैलेंद्र सिंह ने कहा कि भारी वजन से शुरुआत करने के बजाय धीरे-धीरे वजन बढ़ाना नुकसान से बचने का महत्वपूर्ण तरीका है। उन्होंने रीढ़ की समस्याओं को कम करने के लिए जीवनशैली में बदलाव लाने, लंबे समय तक बैठे रहने के बजाय बीच-बीच में टहलने और सही मुद्रा में बैठने की सलाह दी।
सम्मेलन के साथ ही केजीएमयू में सीएमई सत्र और सर्जरी की कार्यशाला का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम में डॉ. गुरुराज (दिल्ली), डॉ. शैलेश हडगावकर (पुणे), डॉ. तरुण सूरी (दिल्ली), डॉ. नीरज वासवदा (मुंबई), डॉ. विशाल कुंदनानी (मुंबई), डॉ. संदीप केसरवानी, डॉ. हरप्रीत सिंह, डॉ. आशीष जान और डॉ. संजय यादव माैजूद रहे।
सिर्फ 10 फीसदी मामलों में सर्जरी की जरूरत
केजीएमयू के ऑर्थोपेडिक विभाग के अध्यक्ष प्रो. आशीष कुमार ने बताया कि कमर दर्द और स्लिपडिस्क के ज्यादातर मामलों में सर्जरी की जरूरत नहीं होती है। सिर्फ 10 फीसदी मामले ही ऐसे होते हैं, जिनमें सर्जरी की जरूरत है।
स्पाइन कॉन्क्लेव।
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