लखनऊ। घर सामने है, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए पानी से गुजरना पड़ रहा है। किसी ने ट्यूब बांधकर नाव बना ली है तो किसी ने कबाड़ की बोतलों को बोरी में भरकर पानी पार करने का रास्ता निकाल लिया है। दाउदनगर में मंगलवार को बाढ़ के बीच जिंदगी की जद्दोजहद का यह मंजर दिखा।
उधर, मौर्य मार्केट के पास लोहरामऊ व आसपास के प्रभावित क्षेत्र के लोगों की सहायता के लिए बनाए गए बाढ़ राहत केंद्र पर राशन की आस में पहुंचे लोग खाली हाथ लौटते दिखे। पानी उतरने लगा है, लेकिन लोगों की मुश्किलें अब भी कम नहीं हुई हैं। प्रशासन को उम्मीद है कि तीन-चार दिन में सड़कों से पानी उतर जाएगा, लेकिन जनजीवन सामान्य होने में करीब 15 दिन लग सकते हैं।
कहीं ट्यूब की नाव, कहीं बोतलों का सहारा
दाउदनगर में शिव कुमार और जयराम ट्यूब के सहारे तैयार की गई नाव से घर की ओर जाते मिले। उन्होंने बताया कि प्रशासन की नाव नहीं मिल पाने के कारण खुद ही इंतजाम करना पड़ा। मोहम्मद बिलाल, सरिता और मोहम्मद सिराज ने कबाड़ की बोतलों को बोरी में भरकर पानी पार करने का जुगाड़ बनाया है। पानी के बीच घर तक पहुंचने की यह मशक्कत बता रही थी कि जलभराव घटने के बाद भी रास्ते आसान नहीं हुए हैं।
राहत की आस, हाथ खाली
मौर्य मार्केट के पास सहायता केंद्र पर शक्ति नगर की पूजा कई चक्कर लगाने के बाद भी राशन-पानी नहीं मिलने की शिकायत करती मिलीं। लोहरामऊ की आरती पांडे ने बताया कि घरों में पानी भरा है और आने-जाने की व्यवस्था ठीक नहीं है। निर्मला के मुताबिक, केंद्र पर घर लौटने को कहा जाता है, लेकिन वहां राहत देने कोई नहीं आता।
बिजली नहीं, पानी का इंतजाम मुश्किल
नंदा पार्क के पास रहने वाले मोहम्मद मोहसिन ने बताया कि उनका घर थोड़ा ऊंचा है। घर से पानी उतर गया है, लेकिन रास्ते और चौखट पर अब भी पानी है। आठ दिन से बिजली नहीं आने के कारण मोटर नहीं चल रहा। प्रशासन और स्वयं सहायता समूह के जो लोग लंच पैकेट के साथ आधा लीटर की जो बोतलें देते हैं, उससे जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है। सभी लोगों को एक-दो किमी दूर चलकर ही पीने का पानी लाना पड़ रहा है।
15 दिन में सामान्य होंगे हालात : एडीएम
एडीएम पूर्वी महेंद्र पाल सिंह ने मंगलवार को नाव से प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में करीब दो फीट पानी कम हुआ है। तीन-चार दिन में सड़कों से पानी उतरने की उम्मीद है। बाढ़ में फंसे लोगों की सुविधा के लिए बाढ़ प्रभावित करीब चार किमी दायरे में करीब 100 नावों की व्यवस्था की गई है। पूरी तरह पानी उतर जाने के बाद भी जनजीवन सामान्य होने में करीब 15 दिन लग सकते हैं। पानी उतरने के बाद सीवरलाइनों की सफाई और संक्रमण रोकने के लिए डीडीटी व ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया जाएगा। प्रशासन फंसे लोगों को लंच पैकेट, तिरपाल, माचिस समेत उनके खाने की व्यवस्था कर रहा है। इलाके में नगर निगम की ओर से मोबाइल टॉयलेट भी लगाए गए हैं।
बोतलों को बोरी में भरकर बनाई जुगाड़ की नाव।
बोतलों को बोरी में भरकर बनाई जुगाड़ की नाव।
बोतलों को बोरी में भरकर बनाई जुगाड़ की नाव।
बोतलों को बोरी में भरकर बनाई जुगाड़ की नाव।
बोतलों को बोरी में भरकर बनाई जुगाड़ की नाव।
बोतलों को बोरी में भरकर बनाई जुगाड़ की नाव।
बोतलों को बोरी में भरकर बनाई जुगाड़ की नाव।
बोतलों को बोरी में भरकर बनाई जुगाड़ की नाव।
बोतलों को बोरी में भरकर बनाई जुगाड़ की नाव।
बोतलों को बोरी में भरकर बनाई जुगाड़ की नाव।
बोतलों को बोरी में भरकर बनाई जुगाड़ की नाव।
बोतलों को बोरी में भरकर बनाई जुगाड़ की नाव।
बोतलों को बोरी में भरकर बनाई जुगाड़ की नाव।
बोतलों को बोरी में भरकर बनाई जुगाड़ की नाव।
बोतलों को बोरी में भरकर बनाई जुगाड़ की नाव।
बोतलों को बोरी में भरकर बनाई जुगाड़ की नाव।
बोतलों को बोरी में भरकर बनाई जुगाड़ की नाव।
बोतलों को बोरी में भरकर बनाई जुगाड़ की नाव।
बोतलों को बोरी में भरकर बनाई जुगाड़ की नाव।
बोतलों को बोरी में भरकर बनाई जुगाड़ की नाव।
बोतलों को बोरी में भरकर बनाई जुगाड़ की नाव।
बोतलों को बोरी में भरकर बनाई जुगाड़ की नाव।
बोतलों को बोरी में भरकर बनाई जुगाड़ की नाव।
बोतलों को बोरी में भरकर बनाई जुगाड़ की नाव।
बोतलों को बोरी में भरकर बनाई जुगाड़ की नाव।
बोतलों को बोरी में भरकर बनाई जुगाड़ की नाव।
बोतलों को बोरी में भरकर बनाई जुगाड़ की नाव।
बोतलों को बोरी में भरकर बनाई जुगाड़ की नाव।
बोतलों को बोरी में भरकर बनाई जुगाड़ की नाव।
बोतलों को बोरी में भरकर बनाई जुगाड़ की नाव।
बोतलों को बोरी में भरकर बनाई जुगाड़ की नाव।
बोतलों को बोरी में भरकर बनाई जुगाड़ की नाव।
बोतलों को बोरी में भरकर बनाई जुगाड़ की नाव।
बोतलों को बोरी में भरकर बनाई जुगाड़ की नाव।
बोतलों को बोरी में भरकर बनाई जुगाड़ की नाव।
बोतलों को बोरी में भरकर बनाई जुगाड़ की नाव।