लखनऊ। नौकर से नाराजगी के चलते उसकी हत्या करने वाले मयंक को एडीजे काशी प्रसाद यादव ने उम्रकैद और और 30 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है। कोर्ट ने मामले में आरोपी रहे उमाशंकर को बरी कर दिया है।
कोर्ट में सरकारी वकील ने बताया कि मामले की रिपोर्ट वादी चक्रधर मिश्रा ने माल थाने में दर्ज कराई थी। इसमें बताया गया था कि वादी का बेटा ज्ञानचंद्र उर्फ ज्ञानू कस्बे में रहने वाले उमाशंकर की दुकान पर सेल्समैन था। घर पर कुछ काम होने के कारण ज्ञानू कुछ दिनों से दुकान पर नहीं गया था। 14 जून 2009 की सुबह आरोपी मयंक वादी के घर आया और ज्ञानू को बुलाकर साथ ले गया। 15 जून को वादी के दूसरे बेटे रामू को जानकारी मिली कि ज्ञानू की हत्या कर दी गई है।