लखनऊ। शराब पीकर गाली देने का विरोध करने पर हत्या, जानलेवा हमला करने, मारपीट, बलवा, गाली-गलौज और जान माल की धमकी देने के पांच आरोपियों मंशा राम, आशा राम, माया राम, राम प्रकाश और मेवालाल को दोषी ठहराकर सजा सुनाई गई है। एडीजे विनीत नारायण पांडेय ने सभी को जुर्माने से भी दंडित किया है।
कोर्ट ने हत्या और हत्या के प्रयास समेत अन्य आरोपों में मंशाराम को आजीवन कारावास और 55 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है। वहीं, आशा राम, राम प्रकाश, माया राम और मेवालाल को हत्या के प्रयास समेत मारपीट, जानमाल की धमकी के आरोपों में पांच-पांच साल की कैद और पांच-पांच हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।
सरकारी वकील ने बताया कि वादी चंद्र शेखर ने नगराम थाने में 26 जुलाई 2009 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया गया था कि शाम सात बजे के करीब उसके गांव का आशा राम वादी के भाई ईश्वर दीन के दरवाजे पर आया और शराब पीकर गालियां देने लगा। मना करने पर आरोपी ने अपने भाई मंशा राम, राम प्रकाश, माया राम, राम नरेश और मेवा लाल को बुला लिया। बताया गया कि आरोपी लाठी, डंडा और कुल्हाड़ी लेकर आए और ईश्वर दीन पर हमला कर दिया। वादी और उसके पिता मक्का जब ईश्वर दीन को बचाने के लिए दौड़े तो आरोपियों ने उन्हें भी मारपीट कर घायल कर दिया। शोर सुनकर गांव वालों के आने पर आरोपी भाग गए थे। बताया गया की कुल्हाड़ी के वार से घायल मक्का और गौरीशंकर को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां मक्का की मौत हो गई थी।