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Lucknow News: एआई व डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़कर बेहतर होगा लाइब्रेरी सिस्टम

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लखनऊ। डिजिटल और एआई आधारित वर्गीकरण तकनीक से पुस्तकालयों और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जानकारी व सूचनाएं आसानी से उपलब्ध हो सकती हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग की शोधार्थी डॉ. कृतिका अग्रवाल और डॉ. बबीता जायसवाल ने सात दशकों में प्रकाशित 296 शोध-पत्रों के विश्लेषण पर आधारित महत्वपूर्ण अध्ययन प्रस्तुत किया है। इसमें लाइब्रेरी वर्गीकरण के विकास, बदलते रुझानों और भविष्य की दिशा को स्पष्ट किया गया है।
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अध्ययन में सामने आया कि 1960 का दशक ''वर्गीकरण शोध'' का स्वर्णकाल रहा, खासकर 1969 से 1973 के बीच। इस दौरान प्रख्यात पुस्तकालय वैज्ञानिक डॉ. एसआर. रंगनाथन के सिद्धांतों का गहरा प्रभाव दिखाई देता है। हालांकि, 1972 के बाद शोध गतिविधियों में गिरावट आई, लेकिन 2004 से 2013 के बीच इसमें कुछ सुधार दर्ज किया गया। प्रमुख योगदानकर्ताओं में डॉ. एसआर. रंगनाथन, ए. नीलामेघन और एम. ए. गोपीनाथ जैसे विद्वानों के नाम हैं। संस्थागत स्तर पर बंगलूरू स्थित डॉक्यूमेंटेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर का योगदान सबसे अधिक रहा। दिल्ली विश्वविद्यालय समेत अन्य संस्थानों की भी अहम भूमिका रही।
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