लेवाना सुइट्स अग्निकांड मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के वीसी को 22 सितंबर को दस्तावेजों के साथ तलब किया है। कोर्ट ने लखनऊ में उन भवनों व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का ब्योरा मांगा है, जो बिना फायर एनओसी के चल रहे हैं। यह भी पूछा है कि इनके परमिट सही हैं या गैरकानूनी ढंग से जारी किए गए हैं। ऐसे भवनों के भू उपयोग (लैंडयूज) की जानकारी भी तलब की है। कोर्ट ने हलफनामा देकर बताने को कहा है कि ऐसे मामलों में अगर कोई कर्मी दोषी पाया गया हो तो उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई?
न्यायमूर्ति राकेश श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की खंडपीठ ने इस मामले को जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया था। इसके बाद ‘इंसिडेंट्स ऑफ फायर एट लेवाना सुइट्स होटल’ शीर्षक से दर्ज पीआईएल पर राज्य सरकार को अपर मुख्य सचिव गृह और एलडीए को वीसी के माध्यम को पक्षकार बनाने का आदेश दिया। कोर्ट ने दो स्थानीय अधिवक्ताओं को बतौर न्यायमित्र नियुक्त करते हुए घटना की रिपोर्टिंग करने वाले ‘अमर उजाला’ समेत प्रमुख अखबारों व टीवी चैनलों को खबरों की सामग्री पेश करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने मुख्य अग्निशमन अधिकारी से पूछा है कि अग्निशमन को लेकर ऐसे कितने गलत अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी किए गए? क्या स्वीकृत नक्शे के तहत अनापत्ति दी गई? कोर्ट ने हजरतगंज स्थित कोचिंग सेंटर में लगी आग का भी संज्ञान लिया है।
लेवाना सुइट्स अग्निकांड जैसी घटनाएं भविष्य में न हों, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए। हालांकि ऐसी घटनाओं पर सरकार जांच व निरीक्षण का आदेश देती है। एलडीए और अन्य जिम्मेदार भवनों को ढहाने व सीलिंग की जोरशोर से बात करते हैं। वहीं जनता समय के साथ जैसे इन घटनाओं को भूल जाती है, वैसे ही संबंधित जांच व अभियान भी दम तोड़ देते हैं।
-हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ