विदेश में नौकरी के नाम पर अवैध वसूली।
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विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर यूपी में अवैध एजेंसियां बड़े पैमाने पर मोटी रकम वसूलने का खेल करती हैं। वैध फीस अधिकतम 35 हजार रुपये है, लेकिन ये एजेंसियां एक-एक नागरिक से एक लाख से लेकर तीन-तीन लाख रुपये तक वसूली करती हैं। जब नागरिक विदेश पहुंचता है, तब उसे ठगी का पता चलता है। इसके बाद वह विदेश मंत्रालय में शिकायत करता है। विदेश मंत्रालय के प्रोटेक्टर ऑफ इमीग्रेंट्स (पीओई) कार्यालय में ऐसी शिकायतों का अंबार लगा है।
लखनऊ में पीओई के अधिकारी विश्वनाथ प्रताप सिंह ने बताया कि अधिकृत कंपनियों की निगरानी की जाती है, जिससे वह किसी तरह की गड़बड़ी या अधिक वसूली न कर सकें। उन्हें एक आवेदक से अधिकतम 35 हजार रुपये फीस लेने का ही अधिकार है। यह फीस अलग-अलग देशों के लिए अलग रहती है। कितनी फीस होगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आवेदक किस देश में नौकरी के लिए आवेदन कर रहा है।
कुछ देशों में 10-15 हजार रुपये भी फीस है। वहीं, अवैध एजेंसियों की पीओई कार्यालय पहुंचने वाली शिकायतों में लगभग हर आवेदक से एक लाख से लेकर दो-तीन लाख रुपये तक वसूली की बात सामने आती है। जब आवेदक जाल में फंस जाता है, तब वह दफ्तर पहुंचता है।
दलालों के जरिये फैल रहा नेटवर्क
पीओई कार्यालय में पहुंच रही शिकायतों के मुताबिक सोशल मीडिया, व्हाट्सएप और स्थानीय स्तर पर सक्रिय दलालों के जरिये युवाओं को विदेश भेजने का काम किया जा रहा है। कई मामलों में पहले अच्छी नौकरी और मोटी तनख्वाह का भरोसा दिया जाता है और बाद में युवाओं को टूरिस्ट वीजा पर भेज दिया जाता है। विदेश पहुंचने के बाद नौकरी नहीं मिलती या अनुबंध में बताए गए वेतन से कम रकम दी जाती है।
पूर्वांचल में बड़ा जाल
पीओई के आंकड़ों की बात करें तो यहां सबसे अधिक पीड़ितों की शिकायतें पूर्वांचल के जिलों से आती हैं। अधिकतर शिकायतें खाड़ी देशों से संबंधित होती हैं। यही वजह है कि पूर्वांचल में ही अवैध एजेंसियों का जाल सबसे अधिक है। पीओई के अधिकारी अब इन पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रहे हैं। जल्द बड़ी कार्रवाई संभव है।
केस एक :
संतकबीरनगर में अल-जोया इंटरप्राइजेज ने 23 लोगों से 31.20 लाख रुपये वसूले थे। संचालक ने दो साथियों के साथ रूस भेजने और नौकरी दिलाने का झांसा दिया था। रकम लेने के बाद न नौकरी मिली और न विदेश भेजने की प्रक्रिया पूरी हुई।
केस दो :
गोरखपुर के सिंघड़िया में न्यू ग्लोबल एजेंसी ने खाड़ी देशों में नौकरी दिलाने का विज्ञापन जारी किया था। सैकड़ों आवेदक भी जुटाए थे, जिनसे लाखों रुपये की वसूली की गई थी।