मंत्रियों और अधिकारियों के एक लय-ताल में सोचने और काम करने से ही प्रदेश का विकास होगा। आईआईएम परिसर में आयोजित मंथन-2 कार्यक्रम में विकास के लिहाज से पांच मुख्य क्षेत्रों कानून-व्यवस्था, इन्फ्रास्ट्रक्चर, कृषि, औद्योगिक विकास और मानव संसाधन पर अफसरों और मंत्रियों के 10 समूहों ने अपने विजन रखे। प्रत्येक समूह में मंत्री थे और अफसर भी।
युवाओं को प्रेरित करने के लिए उठाए गए विभागीय कदमों पर भी चर्चा हुई। प्रदेश की अर्थव्यवस्था को 10 खरब डॉलर तक ले जाने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार की सबसे ज्यादा जरूरत बताई गई। कृषि क्षेत्र में तकनीक के लिहाज से आमूलचूल परिवर्तन पर बल दिया गया। सीएम योगी आदित्यनाथ ने अच्छा काम करने वाले अधिकारियों और विभागों की सराहना भी की। उन्होंने प्रमुख सचिव, युवा कल्याण डिंपल वर्मा की राइटिंग की तारीफ की।
लीडरशिप डवलपमेंट कार्यक्रम के तहत मंथन का दूसरा संस्करण रविवार को 10 घंटे चला। हर समूह की ओर से एक अधिकारी और एक मंत्री ने डायस से विचार रखे। ग्रुप डिस्कशन के दौरान विजन (दृष्टिकोण), प्रोसेस (प्रक्रिया), प्लानिंग (योजना) और एक्जीक्यूशन (अमली जामा) आदि बिंदुओं पर बात रखी गई। इस दौरान आईआईएम के प्रोफेसरों ने सवाल भी पूछे।
बताया गया कि किसी भी योजना को लागू करने के लिए धन की आवश्यकता होती है। साथ ही तय करना होता है कि कितने समय में उसे सफलतापूर्वक अमली जामा पहनाया जा सकता है और इसका जनता पर प्रभाव क्या पड़ेगा। सरकार के कार्यों को जनता के बीच रखना भी बहुत जरूरी है, ताकि सरकार के विजन को जनता भी आत्मसात कर सके। निवेश एवं निर्यात प्रोत्साहन मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि अधिकारियों और मंत्रियों के एक साथ मिलकर एक दिशा में सोचने पर ही प्रदेश विकास के पथ पर तेजी से दौड़ सकता है।
मानव संसाधन के विकास पर चर्चा के दौरान हर स्तर की शिक्षा की गुणवत्ता के सुधार पर जोर दिया गया। प्राथमिक विद्यालयों में पुस्तकालयों की स्थापना का सुझाव प्रमुखता से रखा गया। उच्च व तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता का थर्ड पार्टी ऑडिट कराने पर भी जोर दिया गया।
ई-हॉस्पिटल की स्थापना की जरूरत
लोग पश्चिमी देशों की तरह ऑनलाइन इलाज की सुविधा हासिल कर सकें, इसके लिए ई-हॉस्पिटल की स्थापना की जरूरत बताई गई। प्रमुख सचिव, चिकित्सा शिक्षा रजनीश दुबे ने डॉक्टरों को प्रोत्साहन के लिए इन्सेंटिव की व्यवस्था लागू करने पर जोर दिया। आउटसोर्सिंग व्यवस्था को ठीक से लागू करने की आवश्यकता भी बताई गई।
कानून-व्यवस्था पर चर्चा के दौरान माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री गुलाबो देवी ने पुलिस कर्मियों की दयनीय स्थिति रखी। बताया कि उनके आवासों की हालत अच्छी नहीं है। चंदौसी की कोतवाली का उदाहरण सामने रखते हुए कहा कि पुलिस कर्मी टूटी बेंच पर प्लास्टिक की चटाई बिछाकर रिपोर्ट लिखते हैं। जहां खाना खाते हैं, वहां पंखा तक नहीं है।
उन्होंने बेहतर रिजल्ट की अपेक्षा के साथ ही कार्यस्थल की दशा सुधारने पर जोर दिया। अपर मुख्य सचिव, गृह अवनीश अवस्थी ने बेहतर कानून-व्यवस्था के लिए अभियोजन में सुधार की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा भी हुए शामिल
मंथन-2 में उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा शामिल हुए। हालांकि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में व्यस्तता के चलते डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य इस बार भी नहीं आ पाए। हमीरपुर उपचुनाव में व्यस्त होने के कारण परिवहन राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार अशोक कटारिया और राज्यमंत्री रणवेंद्र प्रताप सिंह उर्फ धुन्नी सिंह भी नहीं आ सके।