एलडीए की मजबूरी यह है कि आवंटन होने की वजह से इनका न तो दोबारा पंजीकरण हो सकता है ना ही इसे दूसरे माध्यम से बेचा जा सकता है, इसलिए इनका आवंटन निरस्त करने का फैसला किया गया है। इसके बाद उन्हें दोबारा से आवंटन के लिए सूची में लगाया जा सकता है।
एलडीए की शुरुआती जांच में अलकनंदा, कावेरी अपार्टमेंट में ऐसे केस सामने आए हैं, जिनमें 2बीएचके और 2बीएचके प्लस स्टडी फ्लैटों की कीमत करीब 40 लाख रुपये है।
जबकि आवंटी ने अब तक सिर्फ छह लाख रुपये ही जमा किए हैं। ऐसे में बकाया का ब्याज 15 प्रतिशत की दर से लिया गया तो यह बकाए का दोगुना से अधिक हो जाएगा। इतनी कीमत तो मार्के ट रेट पर भी फ्लैट की नहीं मिलेगी। ऐसे में आवंटी भी बकाया पैसा जमा नहीं कर रहे हैं।
पहले नोटिस, एक महीने का समय, फिर कार्रवाई
ओएसडी और बहुमंजिला योजनाओं के प्रभारी राजेश कुमार शुक्ला का कहना है कि अभी सभी अपार्टमेंटों में बिना रजिस्ट्री के मौजूद फ्लैटों के आवंटियों को अंतिम नोटिस भेजा जा रहा है।
एक महीने तक पैसा जमा नहीं होने पर आवंटन निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। सबसे पहले उन आवंटियों पर कार्रवाई होगी जिन्होंने केवल एक या दो किस्त ही जमा की है।
गोमतीनगर विस्तार महासंघ के सचिव उमाशंकर दुबे का कहना है कि फ्लैटों के खाली रहने की वजह से उस अपार्टमेंट की आरडब्ल्यूए को सोसाइटी फीस नहीं मिल पाती है।
इसकी वजह से अपार्टमेंट के रखरखाव, सफाई, सुरक्षा, बिजली बिल, पानी का बिल जैसे खर्च के लिए बजट नहीं जुट पाता है। कॉर्पस फंड के ब्याज से पूरे खर्च नहीं चल पाते हैं। ऐसे में हर फ्लैट से सोसाइटी फीस ली जाती है। अब जिन फ्लैटों में एलडीए ने कब्जा ही नहीं दिया है। उन फ्लैटों से सोसाइटी मासिक फीस कैसे ले?
3500 फ्लैट खाली, नहीं बेच पा रहा प्राधिकरण
एलडीए के पास ऐसे भी फ्लैट मौजूद हैं,़ जिनको प्राधिकरण बेच नहीं पा रहा है। इनकी कीमत घटाकर दोबारा से एलडीए ने पंजीकरण खोले हैं। इनकी संख्या करीब 3500 है। देवपुर पारा योजना में फ्लैटों के निर्माण को निरस्त करके इनकी संख्या कम हुई।
ये फ्लैट कानपुर रोड योजना, कुर्सी रोड योजना और देवपुर पारा योजना में ही मौजूद हैं। गोमतीनगर और गोमतीनगर विस्तार योजना में इनकी संख्या बहुत कम है। वहीं रजिस्ट्री के लिए बचे फ्लैटों की संख्या सबसे अधिक यहीं है