लखनऊ। गोमतीनगर विस्तार के जिस सुविधा भूखंड पर एक साल पहले आपत्ति के बाद आवासीय प्लॉट काटने की प्रक्रिया रोक दी गई थी, वीसी-सचिव बदलते ही एलडीए अफसरों ने उस पर फिर प्लॉटिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्राधिकरण ने इसका भू-उपयोग बदलकर प्लॉटिंग के लिए आपत्ति-सुझाव मांगे हैं।
एलडीए की सूचना मुताबिक गोमतीनगर विस्तार के सेक्टर-1 में कल्पतरू अपार्टमेंट और कम्यूनिटी सेंटर से आगे किनारे की जमीन पर आवासीय भूखंड विकसित होने हैं। इस सामुदायिक सुविधा भूखंड सीएफ-1/43 पर 1250 से 5000 वर्गफीट के 43 प्लॉट काटे जा रहे हैं। इस व्यावसायिक भूखंड का क्षेत्रफल 75 हजार वर्गफीट बताया जा रहा है। 15 दिन में वीसी को संबोधित करते हुए मुख्य नगर नियोजक या सचिव एलडीए के कार्यालय में आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है। सचिव पवन गंगवार की ओर से जारी इस सूचना में पूर्व में स्थगित प्रक्रिया को कोई जिक्र तक नहीं है। इस बारे में एलडीए वीसी अभिषेक प्रकाश का कहना है कि सुविधा भूखंड पर आवासीय भूखंड विकसित करने की प्रक्रिया को अनुचित तरीके से पूरा नहीं होने दिया जाएगा। मैं खुद इसे देखूंगा।
अमर उजाला ने उठाया था मामला
अमर उजाला ने खबर प्रकाशित कर एलडीए अधिकारियों के खेल को उजागर किया था। इसके बाद गोमतीनगर विस्तार की कई आरडब्ल्यूए ने आपत्ति दर्ज कराई थी। उनकी मांग थी कि अपार्टमेंटों में पहले ही सामुदायिक सुविधाएं एलडीए ने नहीं दीं, अब जहां जमीन है वहां तो स्वीमिंग पूल, क्लब जैसी सामुदायिक सुविधाएं दी जा सकती है। इसे पीपीपी मॉडल पर ही विकसित किया जाए।
खास लोगों को तो नहीं दिए जाने हैं भूखंड
अफसरों का तर्क है कि लंबे समय से भूखंड न मिलने से विवादित मामले निपटाने के लिए यहां भू-उपयोग बदला जाना है। हालांकि, जिस तरह से हर आकार के भूखंड काटे जा रहे हैं, उससे संभावना है कि पहली सूची में खास लोग हैं। जिस जमीन को लिया गया है वह 45 मीटर चौड़ी सड़क पर है। यह सड़क दो तरफ हैं। भूखंड के सामने शॉपिंग मॉल तो दूसरी तरफ स्कूल बन रहा है। वहीं, लखनऊ जनकल्याण महासमिति के अध्यक्ष उमाशंकर दुबे ने बताया कि पहले ही मांग रखी थी कि इस जगह पर सामुदायिक सुविधाएं विकसित की जाएं। उस समय ऐसा ही करने का आश्वासन दिया गया था।
पहले एक लाख वर्गफीट था क्षेत्रफल
जिस भूखंड पर आवासीय भूखंड काटे जा रहे हैं, उसका मूल क्षेत्रफल करीब एक लाख वर्गफीट था। इसमें एक बार कटौती हो चुकी है। अब यह तीन चौथाई ही रह गया है। अब यह पूरी तरह खत्म हो जाएगा।