लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एलडीए को जनेश्वर मिश्र पार्क के व्यावसायिक उपयोग पर पुनर्विचार करने की सलाह दी है। अदालत ने ये भी कहा कि ऐसी गतिविधियों का पार्क में रहने वाले पक्षियों और अन्य जीवों पर बुरा असर पड़ता है। यह पर्यावरण के लिए भी ठीक नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने प्रदेश के सभी मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों तथा विकास प्राधिकरणों को निर्देश दिया है कि वे पार्कों, खेल मैदानों और खुले स्थानों का विवरण तैयार कर 10 अप्रैल तक प्रस्तुत करने का आदेश भी दिया है।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने यह आदेश धर्मपाल यादव की जनहित याचिका पर दिया है। याची ने शहर के जनेश्वर मिश्रा पार्क के व्यावसायिक उपयोग पर रोक लगाने की मांग की है। कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई कि लखनऊ का प्रसिद्ध जनेश्वर मिश्र पार्क अभी तक उन पार्कों की आधिकारिक सूची में शामिल नहीं है, जिन्हें यूपी पार्क, खेल के मैदान और खुली जगह (संरक्षण और विनियमन) अधिनियम, 1975 के तहत सुरक्षा प्राप्त है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि इस पार्क को तुरंत इस सूची में शामिल करने पर निर्णय लिया जाए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि अधिनियम की धारा 6 के अनुसार सूचीबद्ध पार्क, खेल मैदान या खुले स्थानों का उपयोग, उस उद्देश्य के अलावा किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकता जब तक कि इसके लिए निर्धारित प्राधिकरण से पूर्व अनुमति न ली जाए। कोर्ट ने सभी 18 मंडलों के कमिश्नर और सभी जिलाधिकारियों को आदेश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में पार्कों, खेल के मैदानों और खुली जगहों का सर्वे करें और उन्हें सरकारी सूची में शामिल करें। इस मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को होगी।