बसंत कुंज योजना के आवंटियों का आक्रोश
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बसंतकुंज योजना में रह रहे करीब 200 परिवारों की रातों की नींद एलडीए के एक फरमान ने उड़ा दी है। 15 साल बाद नींद से जागे प्राधिकरण ने उन्हें अवैध कब्जेदार करार देते हुए बेदखली का नोटिस थमा दिया है। अपनी फरियाद लेकर महिलाएं-बच्चे बृहस्पतिवार को लगी जनता अदालत में पहुंचीं और अफसरों के सामने बिलख पड़ीं। महिलाएं कहती रहीं कि उन्होंने मकान की किस्तें एलडीए में जमा की हैं।
एलडीए बोर्ड ने 2016 में यह आदेश भी किया था कि जो जिस मकान में रह रहा है, उसको उस मकान की रजिस्ट्री कर दी जाएगी मगर अब एलडीए के कर्मचारी आकर धमका रहे हैं। कहते हैं कि मकान खाली कर दो वरना सामान फेंक दिया जाएगा महिलाएं रो रहीं थीं कि उनका घर छीना जा रहा है। इनमें एक मुस्लिम महिला शहजहां को तो रो-रोकर बुरा हाल था। मां रो रही थी तो बेटा भी रोने लगा।
महिलाएं रोती रहीं, लेकिन एलडीए अफसरों को कोई फर्क नहीं पड़ता दिख रहा था। इससे उलट तो वे 15 साल पहले फर्जीवाड़ा कर मकान आवंटन को शह देने वालों की वकालत करते दिखे। एक अफसर तो उस समय अंगड़ाई ले रहे थे, जब महिलाएं उनके साने गिड़गिड़ा रही थीं।
ममता यादव, ज्योति नाग, रंजना श्रीवास्तव, हेमा नेगी सहित सभी महिलाएं बोलीं जब 2016 में बोर्ड का निर्णय हो गया कि अब उनके नाम ही रजिस्ट्री होगी तो उसके बाद सबने अपने मकान में और कमरे बनवा लिए। पहले एक छोटा कमरा ही मिला था।
पहले निकाल देते, और पैसा तो बर्बाद नही होता
एलडीए अफसरों को समस्याएं सुनाते हुए
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ममता यादव, ज्योति नाग, रंजना श्रीवास्तव, हेमा नेगी सहित सभी महिलाएं बोलीं जब 2016 में बोर्ड का निर्णय हो गया कि अब उनके नाम ही रजिस्ट्री होगी तो उसके बाद सबने अपने मकान में और कमरे बनवा लिए। पहले एक छोटा कमरा ही मिला था। इससे जो जमा पूंजी थी वह भी लग गई और अब कहा जा रहा है नए बोर्ड ने पुराने बोर्ड का फैसला निरस्त कर दिया।
जनता अदालत में आए इंदिरा नगर निवासी नवीन गौतम ने बताया कि 1992 में उनको कानपुर रोड योजना में भूखंड आवंटित हुआ था। पैसा जमा हो गया, भूखंड अब तक नहीं मिला। इटावा निवासी नरेंद्र सिंह ने बताया कि 2009 में गोमती नगर विस्तार योजना में प्लॉट आवंटित हुआ था। तब से एलडीए दो बार प्लॉट नंबर दे चुका है, मगर दोनों ही मिसिंग हैं।
जनता अदालत में पहुंचे पंकज कुमार ने बताया कि 1993 में कानपुर रोड योजना में आवंटित भूखंड की रजिस्ट्री एलडीए कर चुका है, मगर कब्जा अब तक नहीं मिला। 25 साल से किराए के मकान में रह रहा हूं। जानकीपुरम सेक्टर एच निवासी प्रीति ने बताया कि वह जिस मकान में वह रह रही हैं वह उनकी मां के नाम है। अब एलडीए ने उसे किसी और को आवंटित कर दिया।
बंसत कुंज के जो लोग आए थे, अवैध रूप से रह रहे हैं। 2016 में बोर्ड ने उनके मामले पर विचार करने का प्रस्ताव किया था मगर इस महीने सात तारीख को हुई बोर्ड बैठक में पुराने प्रस्ताव को निरस्त कर दिया गया। वैसे जो वैध आवंटी हैं, वह भटक रहे हैं। पहला हक उनका है। जनता अदालत में कुल 76 मामले आए। उनमें चार का निस्तारण कर दिया गया। शेष का 15 दिन में निस्तारण कर दिया जाएगा। - एमपी सिंह, सचिव एलडीए