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20 साल इंतजार के बाद भूखंड की जगह रिफंड

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20 साल इंतजार के बाद भूखंड की जगह रिफंड
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आवंटियों को भूखंड देने में असफल होने के बाद एलडीए अब रिफंड का प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। लेकिन इसमें भी पेंच है, क्योंकि ब्याज समेत करीब 100 करोड़ रुपये लौटाने होंगे और इतनी राशि अभी प्राधिकरण के खाते में है नहीं।
अब रिफंड की पूरी कवायद बजट के इंतजाम पर अटक गई है। मालूम हो कि करीब 800 से अधिक आवंटी 15 से 20 वर्ष से भूखंड के इंतजार में है। कोई पूरा पैसा जमा कर चुका है तो कोई रजिस्ट्री करा चुका है।
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एलडीए वीसी अभिषेक प्रकाश ने विवाद वाले भूखंड के आवंटियों को रिफंड देने के निर्देश दिए हैं। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, संपत्ति और वित्त विभाग ने वीसी कार्यालय को एक आकलन बनाकर भी भेज दिया है।
इसमें बताया गया है कि करीब 100 करोड़ रुपये ब्याज सहित आवंटियों को लौटाने होंगे। अब इस पर फैसला वीसी को करना है।
इन योजनाओं में हैं विवाद
गोमतीनगर विस्तार, जानकीपुरम विस्तार, बसंतकुंज, रामनगर योजना, मानसरोवर सेक्टर ओ योजना। इसके अलावा छिटपुट विवाद गोमतीनगर, जानकीपुरम, कानपुर रोड योजना, शारदानगर योजना में भी बने हुए हैं।
रिफंड के लिए भी करना होगा इंतजार
रिफंड के मामले में भी आवंटियों को इंतजार करना होगा। क्योंकि एलडीए के खुद के खाते में अभी 100 करोड़ रुपये नहीं हैं। यह तब है जबकि सामान्य ब्याज दर पर रिफंड किया जाए। किसी तरह एलडीए स्टाफ को ही तनख्वाह दे पा रहा है। वहीं, रिफंड लेना भी आवंटियों के लिए घाटे का सौदा होगा क्योंकि इस दौरान भूखंड की कीमतें रिफंड से कहीं अधिक हो चुकी हैं।
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देखे जा रहे निस्तारण के विकल्प
वीसी एलडीए, अभिषेक प्रकाश ने बताया कि आवंटियों के विवाद निस्तारण के विकल्प देखे जा रहे हैं। इसमें रिफंड के विकल्प पर भी विचार कर रहे हैं। एक आकलन भी कराया जा रहा है। आपसी सहमति से ही कोई निर्णय लिया जाएगा। अभी भी कुछ लोगों ने स्वेच्छा से रिफंड के लिए आवेदन किया है।
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