आवंटी आकांक्षा शुक्ला का कहना है कि हमने एलडीए में कई अधिकारियों से पूछा। लेकिन हमें कोई यह नहीं बता पाया कि ठेकेदार को प्रोजेक्ट की कीमत बढ़ने की वजह से अधिक भुगतान करना पड़ा। इसकी वजह से फ्लैटों की कीमत बढ़ी कोई दूसरा कारण भी नहीं है। इसके बाद भी 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी कीमत में होना एक अचंभा ही है। एलडीए को इसे स्पष्ट करना चाहिए।
एलडीए की खुद की कॉस्टिंग नियमावली के मुताबिक आवंटी को बेची गई संपत्ति की कीमत में बढ़ोतरी अधिकतम 10 प्रतिशत तक अनुमन्य है। इधर एलडीए आवेदन के बाद से करीब 11.39 लाख रुपये बढ़ा चुका है। यह आवेदन के समय प्रस्तावित कीमत का करीब 16.62 प्रतिशत है। कीमत में बढ़ोतरी का यही अनुपात अन्य टाइप के 3 बीएचके, 3 बीएचके सर्वेंट, 4 बीएचके, 4 बीएचके सर्वेंट में भी है।
एलडीए में सरयू अपार्टमेंट में उस समय फ्लैट बुक कराने वाले आवंटियों के बजट से बाहर यह संपत्ति हो गई है। कई फ्लैटों के आवंटी रिफंड ले चुके हैं। वहीं कई आवेदन अब भी एलडीए में रिफंड के लिए लंबित बने हुए हैं। उदाहरण के रूप में 3 बीएचके फ्लैट को ही देखें तो सभी शुल्क और जीएसटी चुकाने के बाद करीब 90 लाख रुपये से अधिक कीमत पहुंच रही है। यह उस समय है जबकि आवंटियों को दो पार्किंग यहां मुफ्त दी गई हैं।
आवंटियों का कहना है कि प्रोजेक्ट को अगर समय पर पूरा कर लिया गया होता तो जीएसटी लागू होने से पहले ही यहां कब्जा शुरू हो गया होता। यह भी चौंकाने वाला है कि जुलाई के बाद ठेकेदार ने कोई काम वहां होने की रिपोर्ट भी एलडीए को नहीं दी। इस देरी की वजह से आवंटियों पर सर्विस टैक्स के 4.5 प्रतिशत की जगह 12 प्रतिशत जीएसटी लग गया। यह भी 4 लाख रुपये तक कीमत आवंटियों के लिए बढ़ाने का काम कर रहा है।
एलडीए के कॉस्टिंग प्रभारी मुकेश अग्रवाल का कहना है कि फाइनल कॉस्ट के समय सभी मदों को जोड़कर ही प्रति यूनिट कीमत निकाली जाती है। सभी विभागों से प्रोजेक्ट पर किए गए खर्च की रिपोर्ट इसके लिए ली जाती है। अगर किसी आवंटी को लगता है कि कीमतों में बढ़ोतरी जायज नहीं है। ऐसे में उनके पास नियमों के मुताबिक ब्याज के साथ अपना पैसा वापस लेने का विकल्प बना हुआ है।