नाका के होटल अग्निकांड में मौतों के लिए एलडीए व अग्निशमन विभाग जिम्मेदार
19 जून 2018 को नाका के होटलों एसएसजे इंटरनेशनल व विराट इंटरनेशनल में अग्निकांड की मजिस्ट्रेट जांच पूरी हो गई है।
इसमें होटल संचालकों के साथ एलडीए व फायर विभाग को सात बेकसूरों की मौत का जिम्मेदार माना गया है।
वहीं, बिना लाइसेंस होटल के बेसमेंट में चल रहे बार के लिए आबकारी विभाग के पूर्ति निरीक्षक के साथ नाका पुलिस को भी निगरानी में शिथिलता का दोषी माना गया है।
हादसे की अंतिम जांच रिपोर्ट कार्रवाई की संस्तुति के साथ सिटी मजिस्ट्रेट गिरजेश चौधरी ने डीएम कौशल राज शर्मा को सौंप दी है।
एक साल से अधिक समय तक चली जांच एक दर्जन से अधिक विभागों के जिम्मेदारों के साथ होटल के स्टाफ, हादसे के बाद होटल में ठहरे सुरक्षित अतिथियों, घायलों का इलाज करने वाले डॉक्टरों से पूछताछ व दर्ज बयान की मदद से पूरी की गई।
ध्वस्तीकरण के आदेश पर भी मेहरबान रहा एलडीए
रिपोर्ट में सामने आया कि एसएसजे इंटरनेशनल के संचालक ने स्वीकृत कराए मानचित्र परमिट संख्या 30101 से इतर अवैध निर्माण कराया। मामले में विहीत प्राधिकारी की ओर से निर्माण का अवैध हिस्सा ध्वस्त करने का आदेश भी दिया गया था। इसी तरह विराट इंटरनेशनल के संचालक की ओर से कराए अवैध निर्माण को 28 नवंबर 2010 को ध्वस्त करने का आदेश जारी हुआ। हालांकि, इसके बावजूद एलडीए के जिम्मेदारों ने अवैध निर्माण ढहाने की कोशिश तक नहीं की।
बिना फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र चल रहे थे दोनों होटल
पड़ताल में पता चला कि दोनों होटल बिना फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र के चल रहे थे। फायर सेफ्टी मानकों से जुड़े प्रमाणपत्र की अवधि अग्निकांड से एक साल पहले ही खत्म हो चुकी थी। इसके बावजूद अग्नि शमन विभाग ने कभी भी दोनों होटलों में जाकर सुरक्षा मानक परखने की न जरूरत समझी और न ही नोटिस जारी किया।
बिना लाइसेंस परोसी जा रही थी शराब
एसएसजे इंटरनेशनल होटल संचालक ने अस्थायी तौर पर बेसमेंट में बार चलाने का लाइसेंस लिया था। इसकी अवधि 20 दिसंबर 2017 से 31 मार्च 2018 तक ही थी। हालांकि, लाइसेंस अवधि खत्म हो जाने के बाद भी होटल में अवैध तरीके से बार चलता रहा। आग भड़काने में इसने सबसे अहम भूमिका निभाई। होटल विराट इंटरनेशनल में बार का संचालन नहीं पाया गया।
मौत का कारण दमघोंटू धुआं व दहशत
होटल में ठहरे लोगों के शवों का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों ने बताया कि मौत दमघोंटू धुएं व दहशत से दम घुटने व हार्ट अटैक के कारण हुई। एक को छोड़कर कोई भी इतना गंभीर तौर पर नहीं जला था जिससे उसकी मौत जलने से हुई हो।
जिम्मेदारों की ढिलाई बनी हादसे का सबब
22 पन्नों की रिपोर्ट में जांच व दर्ज बयान के आधार पर माना गया कि यदि एलडीए ध्वस्तीकरण के आदेश का अनुपालन समय पर करा देता और अग्निशमन विभाग फायर सेफ्टी के मानकों का पालन कराता तो हादसे को रोका जा सकता था। आबकारी विभाग ने भी बिना लाइसेंस चल रहे बार को बंद कराने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की। वहीं, नाका थाने के प्रभारी निरीक्षक ने भी होटल चलाने के मानकों की जांच को निरीक्षण करने में ढिलाई बरती। इसके अलावा एसएसजे इंटरनेशनल के संचालक सुरेंद्र कुमार जायसवाल व विराट इंटरनेशनल के संचालक सुरक्षा एनओसी लिए बिना होटल चलाने के कारण घटना के लिए सीधे तौर पर दोषी व जिम्मेदार साबित होते हैं।
जांच अधिकारी बदले, बयान दर्ज कराने में भी परेशानी
होटल अग्निकांड की 20 जून 2018 से शुरू हुई मजिस्ट्रेट जांच तीन माह में पूरी कर डीएम को सौंपी जानी थी। पड़ताल शुरू होने के कुछ माह बाद ही तात्कालिक जांच अधिकारी व सिटी मजिस्ट्रेट का तबादला हो जाने के बाद नए सिटी मजिस्ट्रेट जीके चौधरी को फिर से हादसे से जुड़े पहलू व बयान टटोलने पड़े। इस दौरान एलडीए, पुलिस, लेसा, फायर के अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ दोनों होटलों के स्टाफ से पूछताछ व बयान दर्ज कराने को भी खासी मशक्कत करनी पड़ी। लगातार नोटिस के बाद भी मामले से जुड़े पक्षकारों ने बयान दर्ज कराने में ढिलाई बरती। जांच के अंतिम दौर में पोस्टमार्टम करने वाले पीएमएस डॉक्टरों के सहयोग न करने से दो डॉक्टरों का बयान दर्ज करने में ही तीन महीने का समय लग गया।
सख्त कार्रवाई कर दंड की संस्तुति की जाएगी शासन से
डीएम कौशल राज शर्मा ने बताया कि सिटी मजिस्ट्रेट जीके चौधरी ने होटल अग्निकांड की अंतिम रिपोर्ट तैयार कर सौंपी है। इसमें मुख्य तौर से हादसे के लिए एलडीए, अग्निशमन, आबकारी व नाका पुलिस की ढुलमुल कार्यप्रणाली को जिम्मेदार मानते हुए दोषी पाया गया है। संबंधित विभागों के जिम्मेदारों को चिह्नित करते हुए इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई कर दंड की संस्तुति शासन से होगी।