लखनऊ। सरकारी अस्पतालों में लगी निजी लॉन्ड्री हर माह लाखों रुपये की चपत लगा रही हैं। क्योंकि इन अस्पतालों में बिजली का मीटर लगा नहीं है और लॉन्ड्री संचालक हर माह अस्पताल को अंदाजे से भुगतान कर रहे हैं। शासन से शिकायत के बाद जांच के आदेश पर अफसरों को सुध आई है। अस्पताल प्रभारियों ने अब लॉन्ड्री में बिजली मीटर लगाने की तैयारी शुरू कर दी है।
बलरामपुर अस्पताल में 776 बेड की क्षमता है। यहां की लाॅन्ड्री में 10 मोटरें 10 हॉर्सपॉवर से अधिक की लगी हैं। रोजाना 1000-1200 चादर, कंबल, तकिया, परदे व कपड़े धुले जाते हैं। लाॅन्ड्री संचालक हर माह 20 हजार रुपये से कम का भुगतान अस्पताल को कर रहा है। वहीं, धुलाई के नाम पर हर माह लाखों रुपये अस्पताल से ले रहा है। यहां लगा बिजली मीटर भी खराब पड़ा है। यही स्थिति लोकबंधु अस्पताल की भी है। यहां की लॉन्ड्री 10 हॉर्सपॉवर, उससे अधिक की चार मोटरें लगी हैं, जो सुबह से शाम तक चलती हैं। लॉन्ड्री में रोजाना 500 से अधिक चादर, तकिया कवर, कंबल धुले जाते हैं। यहां बिजली का मीटर नहीं लगा है। रानी लक्ष्मीबाई महिला अस्पताल की लॉन्ड्री में 10 हॉर्सपॉवर की दो मोटर लगी हैं। यहां रोज 150 से अधिक चादर व अन्य कपड़े धुले जाते हैं। लॉन्ड्री संचालक करीब दो हजार रुपये बिजली के बिल के रूप में अस्पताल प्रशासन को जमा करता है।
लोकबंधु अस्पताल के निदेशक डॉ. सुरेश कौशल ने बताया कि लॉन्ड्री में बिजली का मीटर नहीं लगा है। इस पर मीटर लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
आरएलबी अस्पताल के सीएमएस डॉ.श्याम सुंदर व्यास ने बताया कि अस्पताल की लॉन्ड्री में दो मोटर लगी हैं। करीब दो हजार रुपये बिल का भुगतान लॉन्ड्री संचालक की ओर से अस्पताल में हर माह जमा किया जाता है। मीटर लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
बलरामपुर अस्पताल के निदेशक डॉ. पवन कुमार ने बताया कि लॉन्ड्री में रोज 1000 से अधिक कपड़े धुले जाते हैं। यहां मीटर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। करीब 19 हजार रुपये बिजली के बिल का भुगतान अस्पताल को लॉन्ड्री संचालक कर रहा है।