सूबे के मुखिया से नौकरी की गुहार लगाने आए प्रदेश के बेरोजगारों का सामना लाठियों से हुआ। ज्वॉइनिंग लेटर की मांग को लेकर विधान भवन पर प्रदर्शन करने इन बेरोजगारों को पुलिस ने बेहिसाब पीटा।
इन बेरोजगारों का कुसूर सिर्फ इतना था कि ये जूनियर हाईस्कूल में अध्यापक पद पर भर्ती के लिए ज्वॉइनिंग लेटर चाहते थे। काउंसलिंग के पांच महीने बीत जाने के बाद भी ज्वाइनिंग लेटर न मिलने पर ये अभ्यर्थी विधानसभा प्रदर्शन करने पहुंचे।
इस प्रदर्शन में यूपी भर से करीब 500 अभ्यर्थी इकट्ठे हुए थे। इनमें लड़कियां भी शामिल थीं। विधानसभा पहुंचते ही इनसे बिना कुछ पूछे ही पुलिस ने लाठियां बरसानी शुरू कर दीं।
इस लाठीचार्ज में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। लाठीचार्ज का शिकार हुए एक घायल ने बताया, काउंसलिंग के पांच महीने बीतने के बाद भी ज्वॉइनिंग लेटर नहीं दिया जा रहा है।
कोर्ट को कुछ मामला अटका हुआ है जिसे वकील कोई न कोई बहाना करके टाल रहे हैं। हम यहां ज्वॉइनिंग लेटर की मांग करने के लिए इकट्ठे हुए थे। किसी ने हमारी बात तक नहीं सुनी और देखते ही लाठियां बरसानी शुरू कर दी। पुलिस ने विधानसभा से लेकर लालगंज तक दौड़ा-दौड़ाकर पीटा।
सरकार की वादाखिलाफी पर भी हुआ था हंगामा
हाल ही में सरकार की वादाखिलाफी पर प्रदेशभर के टीचर्स लखनऊ की सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों में वित्तविहीन शिक्षक, प्राचार्य और प्रबंधक थे।
गुस्साए टीचर्स ने धमकी दी कि अगर उनका मानदेय निश्चित न किया गया तो नतीजा सरकार को भुगतना पड़ेगा। प्रदर्शनकारियों के साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष निर्मल खत्री भी मौजूद रहे।
टीचर्स सरकार से मानदेय निश्चित करने की मांग कर रहे थे, इसी मांग को लेकर विधानभवन का घेराव किया। टीचर्स ने अखिलेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन में प्रदेशभर से करीब 3 लाख टीचर्स शामिल हुए।
बैनर और झंडे लेकर बड़ी संख्या में टीचर सड़कों पर चल रहे थे। प्रदर्शन में बड़ी तादाद में महिला टीचर्स भी शामिल थीं।
यहां देखिए पुलिस की बर्बरता का सबूत
इससे पहले भी दिखी पुलिस की बर्बरता
इसी महीने वेतन के लिए तरस रहे स्मारक संरक्षण समिति के कर्मचारियों और पुलिस के बीच जमकर भिड़ंत हो चुकी है। स्मारक संरक्षण समिति के करीब 5500 कर्मचारी वेतन की मांग कर रहे थे। इस प्रदर्शन में पुलिस ने पुरुषों और महिलाओं पर जमकर लाठियां बरसाई थीं।
स्मारक के सफाईकर्मी छोटू की बुधवार तड़के मौत हो गई। मौत की वजह हार्टअटैक बताई जा रही है। छोटू वेतन न मिलने की वजह से परेशान था।
8000 रुपये मासिक वेतन पाने वाला छोटू उजरियांव गांव में किराए से रह रहा था। वेतन न मिलने से छोटू ने दो महीने से मकान का किराया भी नहीं दिया था। वह खुद भी बीमार था उसकी पत्नी गर्भवती है।
जानकारी के मुताबिक तनावग्रस्त होने की वजह से हार्टअटैक से मौत हो गई। छोटू की मौत से गुस्साए कर्मचारी नेता धनंजय और सुरेश राणा के नेतृत्व में शव लेकर 1090 चौराहे पहुंच गए।
इससे पहले सभी स्मारक और पार्क बंद करा दिए गए। चौराहे पर पहुंचकर शव रखकर जाम लगा दिया। प्रदर्शन में छोटू की पत्नी और परिजन भी मौके पर मौजूद थे।