जम्मू कश्मीर के उड़ी में सेना के कैंप पर हुए आतंकी हमले में लश्कर ए तैयबा का हाथ होने की पुष्टि हुई है। 18 सितंबर को हुए इस हमले में सेना के 17 जवान शहीद हो गए थे। सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए चार आतंकवादियों को मार गिराया था और उनके पास से भारी मात्रा में विस्फोटक, असलहे और अन्य सामान बरामद किए थे।
पूरे मामले की जांच राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनआईए) कर रही है। सेना कैंप पर हमले की जांच करने के लिए लखनऊ से भी एनआईए की एक टीम उड़ी भेजी गई थी। सूत्रों की मानें तो अभी तक की जांच में इस बात की पुष्टि हो गई है कि हमले के पीछे पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन लश्कर ए तैयबा था।
जांच में शामिल एनआईए के एक सूत्र ने बताया कि आतंकियों की भाषा को जब डिकोड किया गया तो सामने आया कि यह लश्कर ए तैयबा का कोड वर्ड था। जिसमें अंग्रेजी के अलग अलग अक्षरों को स्थान और समय बताने के लिए प्रयोग किया जा रहा था।
वहीं जो सामान बरामद किए गए थे उनकी भी पड़ताल की गई तो पता चला कि संबंधित ड्राईफ्रूट और दूसरे सामान के जो पैकेट मिले वह पहले भी लश्कर के आतंकियों के पास से मिल चुके हैं। घटना स्थल से सेना ने एके 47, विस्फोटक, शॉल, ड्राइ फ्रूट्स और कई अन्य सामान बरामद किए गए थे।