पिछले एक साल से भी ज्यादा वक्त से अपने ही बेटे को पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही बाराबंकी की निशा को सोमवार को जीत हासिल हो गई।
निशा के हक में फैसला सुनाते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक बड़ा फैसला सुनाया।
सोमवार को यह साबित हो गया कि लखनऊ के श्रीराम औद्योगिक अनाथालय की अधीक्षिका रुचि त्रिपाठी का केस सफेद झूठ पर टिका हुआ था।
यह भी साफ हो गया कि बाराबंकी से लाए गए बच्चे के असली मां-बाप राजस्थान के लोग नहीं खुद निशा ही थी।
कोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ कि रुचि त्रिपाठी पैसों के लिए बाराबंकी से वहां की पुलिस की मदद से बच्चे को यहां लाई थी।
बेंच ने कहा कि डीएनए टेस्ट के आधार पर निशा ही बच्चे की मां है। कोर्ट ने कहा कि 15 जनवरी को बाराबंकी के सीजेएम के सामने बच्चे को निशा के हवाले कर दिया जाएगा।
बेंच ने रुचि त्रिपाठी पर डेढ़ लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। इसमें से एक लाख रुपये कोर्ट से होते हुए निशा को मिलेगा और 50 हजार रुपये डीएनए टेस्ट और समझौता केंद्र को दिए जाएंगे।
इनकी जांच के हुक्म
कोर्ट ने इस पूरे मामले पर सख्त रुख अख्तियार करते हुए बाराबंकी के डीएम, एसपी और बाराबंकी के असंदा थानाक्षेत्र के इंस्पेक्टर के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही अनाथालय और रुचि त्रिपाठी की भी जांच की जाएगी।
हाईकोर्ट के हुक्म के मुताबिक, जांच पूरी होने तक अनाथालय में किसी भी तरह की एडॉप्शन प्रक्रिया पर रोक लगी रहेगी।