माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। खेतों में रंग-बिरंगे छोटे-छोटे कीट दौड़ते दिख जाते हैं। इन्हें अक्सर बच्चे ‘लाल-काले बिंदियों वाला कीड़ा’ कहकर पहचानते हैं। पर असल में ये नन्हें योद्धा लेडीबर्ड बीटल किसानों के लिए वरदान हैं। ये कीट फसल खराब वाले दुश्मन कीटों को चट कर जाते हैं और प्रकृति का संतुलन बनाए रखते हैं। अब यही लेडीबर्ड बीटल वैज्ञानिक खोज के नायक बनने जा रहे हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय की जंतु विज्ञान विभाग की प्रोफेसर गीतांजलि मिश्रा को इन पर शोध के लिए वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के महिला वैज्ञानिकों को दिए जाने वाले विशेष ग्रांट के तहत 26 लाख रुपये की वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है।
प्रो. गीतांजलि अगले तीन वर्षों तक इन बीटल्स की त्वचा पर मौजूद क्यूटिकुलर हाइड्रोकार्बन की पड़ताल करेंगी। ये रसायन केवल बीटल्स की देह को सूखने से नहीं बचाते, बल्कि उनके जीवन की पूरी कहानी बयां करते हैं कि कौन-सा बीटल साथी ढूंढ रहा है, किसकी प्रजनन क्षमता सबसे अच्छी है, कौन ज्यादा मजबूत और टिकाऊ है।
यानी इन छोटे-से कीट की त्वचा का रसायन ही इसकी जीवन-गाथा लिखता है।
g किसानों का भरोसेमंद साथी : लेडीबर्ड बीटल्स का स्वाद कुछ खास होता है। ये एफिड्स, व्हाइटफ्लाई और मिलीबग्स जैसे फसलों के दुश्मन कीटों को चट कर जाते हैं। यही वजह है कि किसान इन्हें सालों से अपना सबसे भरोसेमंद प्राकृतिक कीटनाशक मानते आए हैं। अगर इनकी संख्या बढ़ाई जाए और इन्हें और असरदार बनाया जाए तो खेतों में जहरीले रासायनिक कीटनाशकों की जरूरत घट सकती है। मिट्टी व अनाज सुरक्षित रहेंगे और खेती टिकाऊ बनेगी।
g प्रकृति का संतुलन, भविष्य की खेती : यह शोध केवल विज्ञान की किताबों तक सीमित नहीं रहेगा। यह किसानों की जिंदगी, खेतों की उपज और हमारे भोजन की सुरक्षा से जुड़ा है। शायद आने वाले समय में, जब भी हम खेतों में लाल-काले बिंदियों वाले इस कीट को देखेंगे, तो याद आएगा कि यह सिर्फ कीड़ा नहीं, बल्कि किसानों का प्रहरी और धरती का रक्षक है।