भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की सुरक्षा को लेकर खास प्रबंध किए गए हैं लेकिन काशी विश्वनाथ मंदिर में इसमें बड़ी चूक हो गई।
मोदी जिस समय गर्भगृह में समग्र भारत के अभ्युदय का संकल्प ले रहे थे, उस वक्त चार से अधिक लोग अनधिकृत रूप से वहां घुसने में सफल हो गए थे।
बिना ड्यूटी के जहां पुजारी झोले में पूजा सामग्री-प्रसाद लेकर गर्भगृह में दाखिल हो गए, वहीं ठेकेदार को भी प्रवेश मिल गया।
सुरक्षा में हुई इस लापरवाही के बाद मंदिर प्रशासन सकते में है। न्यास परिषद के अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने सूबे के प्रमुख सचिव धर्मार्थ को अवगत कराने के साथ ही मुख्य कार्यपालक अधिकारी से इसकी रिपोर्ट तलब की है।
राजनाथ भी थे साथ
बाबा विश्वनाथ के दरबार में 17 मई की शाम 5:50 पर मोदी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ और अमित शाह के साथ दर्शन के लिए पहुंचे थे।
उस समय अपर मुख्य कार्यपालक पीएन द्विवेदी, दो लिपिकों समेत कुल 17 कर्मियों की मंदिर में तैनाती की सूची एसपीजी को दी गई थी।
मंदिर कार्यालय से जारी पत्र संख्या-1910 के अनुसार मोदी को दर्शन पूजन कराने की जिम्मेदारी न्यास परिषद के अध्यक्ष पं. अशोक द्विवेदी के आचार्यत्व में सौंपी गई थी।
यूं हुई सुरक्षा में हुई चूक
अशोक द्विवेदी के अलावा उनके साथ गर्भगृह में तीन अर्चक वंशनारायण चौबे, टेकनारायण उपाध्याय और मदन मोहन त्रिपाठी को तैनात किया गया था लेकिन तीन अन्य पुजारी वहां कैसे दाखिल हो गए यह सवाल अब प्रशासन को मथने लगा है।
भोग आरती के पद्धति वाचक राजू मोहले के अलावा श्रीदेव भी गर्भगृह में दाखिल हुए थे। इनके अलावा एक और अर्चक श्रीकांत मिश्र का भी नाम आ रहा है। इतना ही नहीं कुछ ठेकेदार और कारोबारी भी गर्भगृह में अनधिकृत रूप से दाखिल हो गए थे।
न्यास अध्यक्ष ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने प्रमुख सचिव धर्मार्थ को इसकी जानकारी दी है। इसके अलावा मुख्य कार्यपालक को पत्र भेजकर पूछा है कि मोदी जब पूजा कर रहे थे तब गर्भगृह में मनमाना तरीके से पुजारी कैसे घुसे।
बिना जांच के पूजा सामग्री कैसे ले जाई गई? इसे सुरक्षा में बरती गई गंभीर लापरवाही बताते हुए उन्होंने रिपोर्ट तलब की है ताकि भविष्य में इस तरह की गड़बड़ी की पुनरावृत्ति न हो सके।