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दवा खाकर थर्मल स्कैनर को दे रहे धोखा

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लखनऊ। श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से आने वाले मजदूर बुखार की दवा खाकर थर्मल स्कैनर को गच्चा दे रहे हैं। इसका खुलासा ट्रेन में मिले दवाइयों के खाली रैपर से हुआ है। आशंका जताई जा रही है कि अगर मजदूर कोरोना वायरस पीड़ित हुए तो संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा। इसे लेकर रेलवे प्रशासन ने सख्ती की तैयारी कर ली है। दरअसल उत्तर प्रदेश के हजारों श्रमिक महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, कर्नाटक और केरल में फंसे हुए हैं। जिन्हें वापस लाने के लिए स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं। गाड़ियों से प्रतिदिन चारबाग रेलवे स्टेशन और लखनऊ जंक्शन पर मजदूरों को लाया जा रहा है। जहां उनकी थर्मल स्क्रीनिंग कराई जा रही है, ताकि कोरोना के लक्षण नजर आने पर उन्हें इलाज के लिए भेजा जा सके। लेकिन लॉकडाउन में फंसे मजदूरों में डर इस कदर भर गया है कि वह श्रमिक स्पेशल ट्रेन में रवाना होने पर ही बुखार की दवा खा ले रहे हैं। इतना ही नहीं छह घंटे के अंतराल पर दोबारा दवा खा रहे हैं। ताकि थर्मल स्कैनिंग में उनके शरीर का तापमान सामान्य मिले और वे आसानी से अपने घरों तक पहुंच जाएं। गत 9 मई को केरल के कन्नूर से चारबाग रेलवे स्टेशन पहुंची ट्रेन में सफाई कर्मियों को पैरासिटामोल और क्रोसिन के पैकेट मिले। पहले तो रेलवे प्रशासन ने इसे सामान्य माना। लेकिन जब 11 मई को सूरत से लखनऊ आने वाली श्रमिक स्पेशल ट्रेन में भी बुखार की दवा के रैपर मिले तो इस ओर रेलवे अधिकारियों का ध्यान गया। मजदूरों को बुखार की आशंका  चारबाग रेलवे स्टेशन पर 3 मई से अभी तक तकरीबन 35 से 40 श्रमिक स्पेशल ट्रेन आ चुकी है जिनसे करीब 60,000 मजदूर राजधानी पहुंचे हैं। इस बाबत उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी दीपक कुमार ने बताया कि मंडल से ऐसी जानकारी मिली है। मजदूर पैरासिटामोल इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन उन्हें सामान्य बुखार की शिकायत हो सकती है। उन्हें कोरोना है या नहीं, इस पर कुछ नहीं कहा जा सकता।   
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