सेंट्रल बार एसोसिएशन ने नए आपराधिक कानून में फोरेंसिक विज्ञान की भूमिका पर पुराने हाईकोर्ट के ल
लखनऊ। सेंट्रल बार एसोसिएशन ने नए आपराधिक कानून में फोरेंसिक विज्ञान की भूमिका पर पुराने हाईकोर्ट के लॉन में संगोष्ठी की। मुख्य अतिथि लखनऊ के प्रशासनिक न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और हाईकोर्ट के न्याय मूर्ति राजीव सिंह रहे। विशिष्ट अतिथि जिला जज मलखान सिंह और वक्ता डॉ. जीके गोस्वामी थे।
सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अखिलेश जायसवाल ने कहा कि नए आपराधिक कानून में फोरेंसिक विज्ञान की भूमिका से कनिष्ठ अधिवक्ताओं के लिए यह संगोष्ठी काफी हितकारी होगी। मुख्य वक्ता और उप्र स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फोरेंसिक साइंस के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने अपराध के अन्वेषण में फोरेंसिक साइंस के महत्व को विस्तार से समझाया। अन्य अतिथियों ने भी नए अपराधों में फोरेंसिक विज्ञान को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि किसी भी अपराध का अन्वेषण अगर वैज्ञानिक तरीके से किया जाए तो अपराधी का बचना मुश्किल होता है। संगोष्ठी में वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रमोद कुमार पाल, उपाध्यक्ष मध्य आशीष कुमार शुक्ला एवं सौरभ कुमार श्रीवास्तव के अलावा कार्यकारिणी के पदाधिकारी मौजूद रहे।