केंद्रीय राजस्व सचिव और जीएसटी काउंसिल के सचिव डॉ. हसमुख अढिया ने कहा है कि व्यापारियों की परेशानी को देखते हुए सरकार ने 75 लाख सालाना टर्नओवर वाले व्यापारियों को जीएसटी के दायरे से बाहर रखने का फैसला किया है।
पहले यह सीमा 50 लाख तक की थी। इससे छोटे व मझोले व्यापारियों को काफी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू होने से जहां भ्रष्टाचार खत्म होगा वहीं व्यापारियों को अनावश्यक भागदौड़ से मुक्ति मिलेगी और उत्पीड़न की शिकायतें भी कम होंगी।
अढिया मंगलवार को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित ‘जीएसटी संवाद’ कार्यक्रम में बोल रहे थे। व्यापारियों को संबोधित करते हुए अढिया ने कहा कि सरकार ने छोटे व मध्यम व्यापारियों को अधिक से अधिक राहत देने के लिए सालाना टर्नओवर की सीमा 50 से बढ़ाकर 75 लाख किया है।
अलबत्ता इस दायरे में आने वाले व्यापारियों का ‘जीएसटीएन’ पर पंजीकरण अनिवार्य होगा, ताकि वह अपने कारोबार पर लगने वाले टैक्स का कंपाउंडिंग करा सकें। उन्होंने कहा कि जीएसटी के कुछ बिंदुओं को लेकर व्यापारियों में अनावश्यक भ्रम है।
अढिया ने कहा कि टैक्स प्रणाली को सरल और सुगम बनाने के उद्देश्य से लाए जा रहे जीएसटी के सभी प्रावधान व्यापारियों के हित को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं।