राज्यपाल राम नाईक का कहना है कि अच्छी दिवाली ‘अच्छे दिनों’ के साथ आ रही है। पेट्रोल-डीजल के दाम घटे हैं। बाकी महंगाई भी धीरे-धीरे कम होगी। महंगाई कम होगी तो और आनंद मिलेगा। जहां तक कानून-व्यवस्था में सुधार का सवाल है सरकार को लगातार काम करना होगा। यूपी के साथ-साथ अन्य प्रदेशों में भी कानून-व्यवस्था में सुधार करने की जरूरत है।
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सपा के राष्ट्रीय अधिवेशन में निशाने पर रखे जाने के सवाल पर नाईक ने कहा कि जहां तक उन्हें जानकारी है कि सपा के राजनीतिक प्रस्ताव में उनका कोई उल्लेख नहीं था। संभवत: यह राजनीतिक टिप्पणी थी जिस पर वे कुछ नहीं कहना चाहते।
नाईक ने यह बातें सोमवार को यहां राजभवन में आयोजित ‘प्रेस से मिलिए’ कार्यक्रम के दौरान कहीं। राज्यपाल ने नई परंपरा शुरू करते हुए अपने तीन महीने के कामकाज का ब्यौरा पेश किया। यह पहला मौका है जब किसी राज्यपाल ने खुद अपनी जवाबदेही तय करने की पहल शुरू की है।
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बकौल नाईक जब वे जनप्रतिनिधि थे तो अपने वोटरों के प्रति जवाबदेह थे और लोगों के सामने हर साल के कामकाज का लेखा-जोखा रखते थे। बतौर राज्यपाल वे क्या कर रहे हैं, इसकी जानकारी भी लोगों को होनी चाहिए। उनकी पुत्री विशाखा कुलकर्णी ने राजभवन के अधिकारियों-कर्मचारियों के सहयोग से ‘राजभवन में राम नाईक’ पुस्तिका तैयार कराई है जिसमें उनके तीन महीने के कामकाज का लेखा-जोखा है।
नाईक ने कहा कि लोगों में यह धारणा है कि राज्यपाल का पद आराम का होता है। कुछ काम नहीं रहता, पर यह सही नहीं है। राज्यपाल के पास भी काम रहता है। सरकार संविधान के अनुसार काम करे यह सुनिश्चित करना राज्यपाल का दायित्व है और वे अपने इसी दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।
कानून-व्यवस्था पर सीएम से बात हुई, पत्र भी लिखा
‘राजभवन में राम नाईक’ पुस्तिका के विमोचन के बाद सवाल-जवाब का सिलसिला शुरू हुआ। कानून-व्यवस्था के सवाल पर कहा कि इस पर सीएम से बात भी हुई है और जरूरत पड़ने पर पत्र भी लिखा।
मुख्यमंत्री की तरफ से बताया भी गया है कि कानून-व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं। क्या आप संतुष्ट हैं? नाईक ने कहा कि यह ऐसा विषय है जिस पर लगातार सरकार को प्रयत्न करना होगा। अन्य प्रदेशों में भी इसकी आवश्यकता है।
संविधान के अनुसार सरकार काम करे, यही मेरा काम सपा के राष्ट्रीय अधिवेशन में राज्यपाल की भूमिका पर उठाए गए सवाल पर नाईक ने कहा कि उनका काम यह सुनिश्चित करना है कि सरकार संविधान के अनुसार काम करे। राजनीतिक टिप्पणी पर इससे ज्यादा वह कुछ नहीं कहेंगे।
प्रदेश हित में है तो सार्वजनिक करने में बुराई नहीं एक अन्य सवाल के जवाब में राज्यपाल ने कहा कि सूचना के अधिकार के तहत जो जानकारी प्राप्त की जा सकती है और जो प्रदेश हित में है, उसे सार्वजनिक करने में कोई बुराई नहीं है। संवाद जनतंत्र का प्रमुख अंग और आवश्यकता है।
जनता को जानने का हक राज्यपाल ने क्या किया
नाईक ने कहा कि सरकार अगर कोई अध्यादेश उनके पास भेजती है तो लोगों को भी जानने का अधिकार है कि राज्यपाल ने उस पर क्या किया? केवल फाइल में रखकर बैठ जाना उचित नहीं है।
राजभवन कोई खुफिया एजेंसी नहीं मंत्रियों के निजी हित में काम करने संबंधी मुलायम सिंह यादव की टिप्पणी की ओर ध्यान आकृष्ट कराए जाने पर नाईक ने कहा कि राजभवन कोई खुफिया एजेंसी नहीं है, जो ढूंढती रहे ऐसे लोगों को। ऐसे मामलों के लिए लोकायुक्त हैं।
वहां शिकायत की जानी चाहिए। लोक ायुक्त जांच करके रिपोर्ट भेजेंगे। जहां तक लोकायुक्त की पिछली रिपोर्र्टों पर कार्रवाई न होने की बात है तो उन्होंने सारी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को संदर्भित की हैं। मुख्यमंत्री का जवाब आया है कि इसे देख रहे हैं।
....और महाराष्ट्र के नतीजों पर महाराष्ट्र केचुनाव नतीजों पर सवाल हुआ तो नाईक ने कहा कि जनता ने अच्छे फैसले किए हैं। जो जीते हैं सभी को बधाई।
कार्यक्रमों और भागवत से रिश्तों पर दिया जवाब
43 कार्यक्रमों में शामिल हुए, 1700 लोगों से मिले बतौर राज्यपाल अपना रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए नाईक ने कहा कि 90 दिनों में वह राजधानी समेत प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में 43 कार्यक्रमों में शामिल हुए और 1700 से ज्यादा लोगों से मिले।
भागवत से पुराने रिश्ते पिछले दिनों आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात को लेकर सवाल पर नाईक ने कहा, मैंने भागवत और नौ-दस अन्य प्रमुख नेताओं को भोजन पर आमंत्रित किया था। सभी पुराने मित्र हैं। वैसे मैं सभी से मिलता हूं। मुलायम सिंह, मायावती, रीता बहुगुणा जोशी, शरद यादव समेत कई अन्य नेताओं से मुलाकात की। कई नेताओं को तो बुलाकर भेंट किया।
सभी विवि के दीक्षांत समारोह की तारीख तय उच्च शिक्षा को लेकर हुए सवाल पर नाईक ने कहा कि तीन-चार साल से विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह नहीं हुए हैं। तीन विवि नए हैं। बाकी 21 के दीक्षांत समारोह की तारीख तय हो गई है। दो के दीक्षांत समारोह हो भी गए हैं।
राज्यपाल ने बताया कि राजधानी के संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक और कानपुर के छत्रपति शाहूजी महाराज विवि के कुलपति की चयन प्रक्रिया चल रही है। 10-12 दिन में नई नियुक्तियां कर दी जाएंगी। चार विवि में कुलपतियों की नियुक्तियां बाकी हैं।
तीन महीने में इनकी भी नियुक्ति हो जाएगी। उन्होंने कहा कि पहले चांसलर को कुलपति कहता था। अब कुलाधिपति कहने लगा हूं। मैं सुधर रहा हूं।
मेट्रो रेल व जनेश्वर मिश्र पार्क अच्छा काम राज्य सरकार के सकारात्मक कामों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि लखनऊ मेट्रो का भूमि पूजन बड़ा काम है। देखना होगा कि यह कैसे पूरा होता है। मुंबई में 2005 में पहली मेट्रो का भूमि पूजन हुआ था जिसका काम हाल ही में पूरा हुआ है। वक्त पर काम पूरा कराने के लिए सतर्क रहना होगा। इसी तरह जनेश्वर मिश्र पार्क भी अच्छा कदम है। विज्ञापन ही पढ़ा है। अभी देखा नहीं है।