शोनाली जब महज तीन साल की थीं तब उन्होंने मंच पर अपना पहला परफॉर्मेंस दिया था। लखनऊ विश्वविद्यालय से हिंदी में परास्नातक होने के साथ ही उन्होंने भातखंडे से तबला में निपुण (परास्नातक) किया जिसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार से उन्हें छात्रवृत्ति मिली। भातखंडे से ही वोकल में उन्होंने विशारद किया।
शोनाली बताती हैं कि यूं तो उनके पहले गुरु उनके पिता मशहूर बांसुरी वादक गिरिजा शंकर श्रीवास्तव ही हैं जिन्होंने मुझे संगीत की प्रारंभिक शिक्षा दी। मां स्व. आशा श्रीवास्तव ने बहुत प्रोत्साहित किया। प्रयाग संगीत समिति से कथक में प्रभाकर के साथ पं. बिरजू महाराज से भी कथक सीखा है।
वहीं उस्ताद जाकिर हुसैन और पं. स्वपन चौधरी से तबले के गुर सीखे। भातखंडे में गुरु रहे शीतल प्रसाद, पं. बद्री महाराज और पं. कान्थे महाराज से संगीत व तबले की शिक्षा ली। इसके अलावा कई बड़े संगीतकारों का सानिध्य भी समय-समय पर प्राप्त होता रहा।
अमेरिका में म्यूजिक एकेडमी की स्थापना
शोनाली अमेरिका में अपनी म्यूजिक एकेडमी का भी संचालन करती हैं जहां क्लासिकल हिंदुस्तानी म्यूजिक के साथ ही वाद्ययंत्रों की विधिवत शिक्षा दी जाती है। मेलोडीज ऑफ तबला नाम से शोनाली का एक एलबम भी रिलीज हो चुका है। इसमें तीन ताल, झाप ताल और कहरवा बीट का खूबसूरती से इस्तेमाल किया गया है।
ये हैं शोनाली की उपलिब्धयां
वर्ष 1994 और 1995 में भातखंडे के वार्षिक समारोह के दौरान तबला वादन में शोनाली ने पहला पुरस्कार जीता था। वर्ष 1993 और 1994 में उन्होंने नेशनल इंटीग्रेशन यूथ फेस्टिवल में भी उन्हें प्रथम पुरस्कार मिल चुका है।
ऑल इंडिया रेडियो से शोनाली का पुराना नाता रहा है। यहां के ए ग्रेड आर्टिस्ट के रूप में उनकी पहचान रही है। एआईआर के लिए उन्होंने कई बेहतरीन कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर खूब वाहवाही बटोरी। दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम ताल कचेहरी में वे नियमित तबला वादन कर चुकी हैं। शोनाली अब तक टीवी और रेडियो पर भारत, अमेरिका समेत अन्य देशों में 500 से ज्यादा स्टेज परफॉर्मेंस दे चुकी हैं।
सोनाकृति काव्य संग्रह का प्रकाशन
संगीत से प्रेम के साथ ही शोनाली को कविताएं लिखने का भी शौक बचपन से ही रहा। कुछ वर्ष पूर्व उनकी कविताओं का एक संग्रह ‘सोनाकृति’ के नाम से प्रकाशित हो चुका है। उनकी कविताओं में नारी मन के साथ सामाजिक विषयों का भी उल्लेख मिलता है।
विश्व हिंदी ज्योति की पहली अध्यक्ष
शोनाली ने बताया कि अमेरिका में हिंदी भाषियों केबीच काफी लोकप्रिय साहित्यिक संस्था विश्व हिंदी ज्योति की फाउंडर मेंबर रही हैं। यही नहीं वे इस प्रतिष्ठित संस्था की पहली अध्यक्ष भी थीं। उनके पति मनीष कुमार श्रीवास्तव सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और इस समय संस्था के उपाध्यक्ष भी हैं।
बच्चों को भी दिए भारतीय संस्कार
शोनाली कहती हैं कि भले ही उनके तीनों बच्चे अमेरिका में जन्में हों लेकिन उन्होंने बच्चों को भारतीय संस्कारों से कभी दूर नहीं होने दिया। बड़ा बेटा वकालत की पढ़ाई कर रहा है तो छोटा बेटा 12वीं और बेटी पांचवीं की छात्रा है। बताती हैं कि हम आपस में हिंदी में ही बात करते हैं और भारतीय त्योहारों को परिवार व स्थानीय भारतीयों के साथ मिलकर पूरे जोश के साथ मनाते हैं।