कमल रानी ने अपनी सक्रियता व परिश्रम से आजादी के बाद से कांग्रेस के प्रभाव वाली घाटमपुर सीट पर भाजपा के लिए जमीन तैयार की। वर्ष 1996 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने पार्टी नेतृत्व के भरोसे को सही साबित करते हुए चुनाव में जीत हासिल की। 1998 में फिर चुनाव हुए तो उन्होंने फिर से जीत हासिल की। हालांकि, इस बार भी लोकसभा चुनाव का सत्र पूरा नहीं हुआ और 1999 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने फिर से इस सीट पर चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
वर्ष 2012 के चुनाव में उन्होंने रसूलाबाद विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और उन्हें हार का सामना करना पड़ा। 2017 के विधानसभा चुनाव में जब भाजपा पहले से ही आगे लग रही थी तब कमल रानी ने घाटमपुर विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल की। उन्हें सरकार में मंत्री पद दिया गया।
दरअसल, घाटमपुर क्षेत्र आजादी के बाद से ही कांग्रेस के प्रभाव वाला था। इसके बाद यहां समाजवादी पार्टी का प्रभाव बढ़ा इस दौरान कमल रानी ने जनता में अपनी पैठ बनाकर यहां भाजपा को मजबूत किया। सरकार बनने पर वह प्राविधिक शिक्षामंत्री बनीं।