लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में किडनी प्रत्यारोपण ने गति पकड़ ली है, लेकिन लिवर प्रत्यारोपण की गाड़ी पटरी से उतरी है। यह स्थिति तब है, जब केजीएमयू में दो साै से ज्यादा मरीज प्रत्यारोपण के इंतजार में हैं।
राजधानी में केजीएमयू ही एकमात्र सरकारी संस्थान है, जहां लिवर और किडनी दोनों प्रत्यारोपण होते हैं। यहां निजी अस्पताल के मुकाबले आधी कीमत में प्रत्यारोपण हो जाता है। ये सुविधाएं होने के बावजूद काफी समय से प्रत्यारोपण की गति सुस्त है, जबकि प्रत्यारोपण के लिए मरीजों की लंबी लाइन लगी है। प्रत्यारोपण न होने से मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों की ओर जाना पड़ रहा है।
एक महीने में दो किडनी प्रत्यारोपण
केजीएमयू में पिछले कुछ समय से किडनी प्रत्यारोपण ने रफ्तार पकड़ी है। एक महीने में यहां दो किडनी प्रत्यारोपण का लक्ष्य रखा गया है। 10 दिन पहले किडनी प्रत्यारोपण होने के बाद इस महीने की 12 तारीख को एक बार फिर से प्रत्यारोपण प्रस्तावित है।
केजीएमयू में बनने वाला है ट्रांसप्लांट ओटी परिसर
केजीएमयू में अंग प्रत्यारोपण के लिए समर्पित ओटी बनने वाली है। इसके निर्माण पर करीब 20 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है। इसके लिए केजीएमयू प्रशासन ने एक करोड़ 15 लाख रुपये जारी भी कर दिए हैं। ओटी परिसर होने पर संक्रमण की आशंका कम होगी। इससे प्रत्यारोपण की दर बेहतर होगी और मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा।
Iकेजीएमयू में एक महीने में दो किडनी प्रत्यारोपण का लक्ष्य रखा गया है। लिवर प्रत्यारोपण में कुछ सुस्ती आई थी, लेकिन इसमें भी तेजी लाई जाएगी। I
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- प्रो. केके सिंह, प्रवक्ता केजीएमयूI