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Lucknow News: 43 साल की उम्र में तीसरी बार किडनी प्रत्यारोपण

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जानकारी देते डॉक्टर।
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लखनऊ। शहीद पथ स्थित निजी अस्पताल के डाॅक्टरों ने 43 साल के रेलवे ठेकेदार को नया जीवन दिया है। डाॅक्टरों ने दो बार किडनी प्रत्यारोपित करा चुके ठेकेदार में तीसरी बार किडनी प्रत्यारोपित की।
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डॉ. मनमीत सिंह ने बताया कि ठेकेदार को पहली बार वर्ष 2013 में किडनी खराब होने की जानकारी मिली। वर्ष 2016 में उनके सबसे बड़े भाई ने किडनी दी। वर्ष 2023 में यह किडनी खराब हो गई। इसके बाद वर्ष 2024 में पत्नी ने अपनी किडनी दान दी, लेकिन महज एक महीने में ही वह फेल हो गई। ऐसे में वे फिर से डायलिसिस पर आ गए। कई अस्पतालों ने तीसरी बार किडनी प्रत्यारोपित करने से मना कर दिया। ऐसे में वे शहीद पथ स्थित अस्पताल पहुंचे। यहां तीसरी बार किडनी प्रत्यारोपित करने की मंजूरी दी गई। इसके बाद मरीज से 16 साल बड़े भाई ने किडनी दान दी। प्रत्यारोपण के बाद मरीज का क्रिएटिनिन 0.9 है, जो इस सर्जरी की सफलता का संकेत है।
एक ही ऑपरेशन में हटाकर लगाई नई किडनी
किडनी प्रत्यारोपण के बाद ज्यादातर समय पुरानी किडनी छोड़ दी जाती है और नई किडनी प्रत्यारोपित कर दी जाती है। इस मामले में यह मरीज की पांचवीं किडनी थी। यानी दो जन्म से और दो ट्रांसप्लांट वाली किडनी। पांचवीं किडनी लगाने के लिए स्थान कम था। इसको देखते हुए एक ही सर्जरी में पुरानी किडनी निकाली गई और नई प्रत्यारोपित कर दी गई। यह जटिल प्रक्रिया थी, लेकिन इसे सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
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किडनी खराब होने के लक्षण
पेशाब बनना बहुत कम हो जाना, आंखों के नीचे सूजन, फेफड़ों में पानी भरना, पेट फूलना, भूख कम लगना, मितली आना, एनीमिया और कमजोरी।
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