लखनऊ। सआदतगंज निवासी सुनीता (30, बदला हुआ नाम) पिछले एक साल से बलरामपुर अस्पताल में डायलिसिस करा रही हैं। परिजनों का आरोप है कि छह महीने की डायलिसिस के बाद वह हेपेटाइटिस बी से संक्रमित हो गईं। आलमबाग के शानू (बदला हुआ नाम) के साथ भी यही स्थिति हुई। डायलिसिस प्रक्रिया के दौरान वह भी संक्रमण की चपेट में आ गए। अब इन दोनों मरीजों को मजबूरन संक्रमित ग्रुप वाली मशीनों पर डायलिसिस करानी पड़ रही है।
ये दो मामले केवल उदाहरण हैं। अस्पताल में डायलिसिस करा रहे मरीजों के हेपेटाइटिस बी और सी से संक्रमित होने के कई गंभीर मामले सामने आए हैं, जिसके कारण बलरामपुर अस्पताल में पीपीपी मॉडल पर संचालित डायलिसिस यूनिट एक बार फिर विवादों में है।
अस्पताल की इस यूनिट में 14 मशीनें हैं, जिनमें से तीन मशीनें संक्रमित मरीजों के लिए आरक्षित हैं। वर्तमान में यहां 18 ऐसे मरीज पंजीकृत हैं, जो इलाज शुरू होने के समय संक्रमणमुक्त थे, लेकिन अब हेपेटाइटिस बी-सी से ग्रसित हैं। आरोप है कि डायलाइजर के गलत इस्तेमाल और प्रोटोकॉल के उल्लंघन के कारण संक्रमण फैल रहा है। करीब तीन साल पहले भी इसी यूनिट में 30 से अधिक मरीज एक साथ संक्रमित हुए थे, लेकिन व्यवस्था में सुधार नहीं दिखा।
संक्रमित होने के कारणों की होगी जांच
मरीजों के संक्रमित होने के कारणों की जांच की जाएगी। यदि यूनिट की कार्यप्रणाली में कोई लापरवाही पाई जाती है, तो उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. हिमांशु चतुर्वेदी, सीएमएस