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फिल्म निर्माता कंपनी के मालिक के अपहरण केस की जांच में सामने आई करोड़ों रुपये ठगने की कहानी

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फिल्म निर्माता कंपनी के मालिक के अपहरण केस की जांच में सामने आई करोड़ों रुपये ठगने की कहानी
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विभूतिखंड में कंस्ट्रक्शन और फिल्म निर्माता कंपनी के संचालक शिवबचन यादव के अपहरण के पीछे करोड़ों रुपये ठगने की बड़ी कहानी सामने आ रही है।
पुलिस ने शिवबचन यादव की तलाश शुरू की तो कई ऐसे बिंदु सामने आए, जिससे अपहरण का मामला फर्जी लग रहा है। विवेचना के दौरान पता चला कि शिवबचन यादव ठगी का गोरखधंधा करता था।
उसने लोगों से जमीन के नाम पर करोड़ों रुपये वसूलने के साथ ही नौकरियां दिलाने समेत अन्य बहानों से 100 करोड़ से भी अधिक की रकम वसूली।
इसके बाद खुद ही लापता होकर छोटे भाई से अपने ही अपहरण का केस दर्ज करा दिया। अब पुलिस ठगी और फर्जी केस दर्ज कराने के सनसनीखेज मामले का पर्दाफाश करने के लिए शिवबचन यादव को खोज रही है।
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यह था मामला
शिवबचन यादव मूलरूप से वाराणसी के चौबेपुर इलाके का रहने वाला है और कई साल से यहां परिवारीजनों के साथ विभूतिखंड के वास्तुखंड इलाके में किराये के मकान में रह रहा है। वह अपनी एक कंस्ट्रक्शन कंपनी और शिवा मूवी सींस के नाम से फिल्में, टीवी सीरियल व डॉक्युमेंट्री बनाने का भी काम करता था। उसका ऑफिस विभूतिखंड इलाके में ही है। 21 मई को वह संदिग्ध हालात में लापता हो गया था। छोटे भाई वीरेंद्र ने चार दिन खोजबीन के बाद 25 मई को विभूतिखंड थाना में उसके अपहरण का केस दर्ज कराया था।
भाई के नंबर से कोई कॉल करके मांग रहा था पांच लाख फिरौती
वीरेंद्र ने पुलिस को बताया था कि भाई के लापता होने के बाद दो दिन तक कोई व्यक्ति उनके मोबाइल नंबर से उसके नंबर पर कॉल करके अपहरण की सूचना देते हुए पांच लाख रुपये फिरौती मांग रहा था। उसने पुलिस को सूचना देने पर भाई को जान से मारने की धमकी दी तो वह घबरा गया। 23 मई के बाद से शिवबचन का फोन बंद हो गया। पुलिस ने बताया कि शिवबचन की कंस्ट्रक्शन कंपनी का काम वीरेंद्र ही देखता है। कारोबार का सारा लेनदेन उसके ही बैंक खाते से होता है इसलिए पुलिस की नजर में उसकी भूमिका भी संदिग्ध है।
लापता होने से 15 दिन पहले सुरक्षाकर्मी हटाने पर
इंस्पेक्टर राजीव द्विवेदी का कहना है कि जांच में कई ऐसे बिंदु सामने आए जिससे शिवबचन के अपहरण की कहानी संदेह के घेरे में है। पता चला कि शिवबचन शाहजहांपुर के तिलहर निवासी सुरक्षाकर्मी दिनेश पटेल को साथ रखता था। उसे हर महीने करीब 20 हजार रुपये वेतन भी देता था। लापता होने से 15 दिन पहले ही उसने दिनेश को नौकरी से हटा दिया था। हालांकि, शिवबचन के भाई के मुताबिक सुरक्षाकर्मी से रुपयों को लेकर विवाद हो गया था इसलिए उसे हटाया गया। उधर, पुलिस सुरक्षाकर्मी हो हटाने के पीछे सोची-समझी रणनीति मानते हुए जांच कर रही है।
अपने ही दो एजेंट पर अपहरण का शक जताने पर
शिवबचन के भाई वीरेंद्र ने गोरखपुर व महाराजगंज के दो शिक्षकों पर अपहरण का शक जताया था। इंस्पेक्टर ने बताया कि पुलिस टीम दोनों शिक्षकों के पास पहुंची तो दूसरी ही कहानी सामने आई। शिक्षकों ने बताया कि वह शिवबचन के लिए ही काम करते थे। लोगों को नौकरी का झांसा देकर वह लखनऊ में शिवबचन के पास भेजते थे। शिवबचन उनसे रुपया वसूलकर कमीशन देता था। कई लोगों से उन्होंने सीधे लाखों रुपया लेकर शिवबचन को दिया। शिवबचन पूरी रकम डकारकर लापता हो गया। अब नौकरी के नाम पर ठगे गए लोग उन पर रुपया लौटाने का दबाव बना रहे हैं। दोनों शिक्षकों भी शिवबचन को तलाश रहे हैं। शिवबचन ने दोनों से बचने के लिए ही उन पर अपहरण का फर्जी आरोप लगाया है।
घर पर शिवबचन के करीबियों को मुखबिर बनाकर भेजने पर
शिवबचन का वाकई अपहरण हुआ है या नहीं? इसका पता लगाने के लिए इंस्पेक्टर राजीव द्विवेदी ने उसके गांव में रहने वाले अपने कुछ परिचितों की मदद ली। उन्होंने ऐसे लोगों को चुना जो शिवबचन के परिवार से भी परिचित थे। इसके बाद उन्हें मुखबिर बनाकर कुछ दिन के लिए लखनऊ में शिवबचन के घर रहने के लिए भेजा गया। इस दौरान इंस्पेक्टर लगातार उक्त लोगों के संपर्क में रहे। मुखबिर उन्हें घर में होने वाली पल-पल की गतिविधियों की खबर देते थे। इंस्पेक्टर का कहना है कि उनके लोगों ने शिवबचन के परिवार के किसी भी सदस्य के चेहरे पर शिकन नहीं देखी जबकि वह परिवार का सबसे कमाऊ सदस्य है। ऐसा लग रहा है कि परिवारीजनों को उसके बारे में सब पता है और वह उसके संपर्क में हैं।
लापता होने वाले दिन ही जौनपुर के एक युवक से वसूले थे 52 लाख रुपये
इंस्पेक्टर ने बताया कि शिवबचन ने लापता होने वाले दिन ही जौनपुर के एक युवक से नौकरी के नाम पर 52 लाख रुपये वसूले थे। उसने युवक को टीजीटी व पीजीटी में नौकरी का झांसा दिया था। इसी नाम पर उसने कई युवकों से ठगी की थी।
आठ साल पहले भी हुआ था लापता, दो साल बाद लौट आया था
पुलिस ने बताया कि शिवबचन आठ साल पहले भी संदिग्ध तरीके से लापता हो गया था। परिवारीजनों ने उसकी काफी खोजबीन की, लेकिन कुछ पता नहीं चला। लगभग दो साल बाद वह वापस आया। हालांकि, इस दौरान वह कहां और किसके संपर्क में रहा? उसने क्या किया? इसका आज तक खुलासा नहीं हो सका है।
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नेपाल की सीमा पर मिल रही लोकेशन
इंस्पेक्टर ने बताया कि शिवबचन के लापता होने के बाद उसके मोबाइल फोन की लोकेशन निकलवाई गई तो वह नेपाल सीमा पर मिली। पुलिस टीम उसकी तलाश में गई लेकिन सुराग नहीं मिला। ऐसा लगता है कि वह अपना मोबाइल फोन अक्सर बंद ही रखता है या फिर यहां का नंबर बंद करके कोई दूसरा सिमकार्ड इस्तेमाल कर रहा है। मोबाइल फोन की लोकेशन के आधार पर पुलिस टीम ने सात बाद गोरखपुर समेत पूर्वांचल के कई जनपदों में दबिश दी लेकिन शिवबचन का पता नहीं चला। बकौल इंस्पेक्टर 30 मई को उसकी आखिरी लोकेशन गोरखपुर से नेपाल की तरफ मिली थी। पुलिस का मानना है कि वह नेपाल भाग गया है।
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