लखनऊ के अमीनाबाद की मारवाड़ी गली निवासी 70 वर्षीय प्रमोद उर्फ विनय श्रीवास्तव के संदिग्ध हालात में गायब होने के पीछे सनसनीखेज कहानी सामने आई है। प्रभारी निरीक्षक सुनील कुमार दुबे का कहना है कि प्रमोद के पास करोड़ों रुपये कीमत का पुश्तैनी मकान है, जिसे हड़पने के लिए दूर के रिश्तेदारों व करीबियों ने उनका अपहरण कर लिया था।
अपहरण के बाद प्रमोद को दुबग्गा व सीतापुर के अलग-अलग ठिकानों पर तीन दिन तक बंधक बनाकर रखा गया। अपहरणकर्ताओं ने वसीयत बनवाकर उनका अंगूठा लगवाया, फिर नहर में फेंक दिया। पुलिस ने चार लोगों को पकड़कर पूछताछ की तब मामला खुला।
प्रमोद की तलाश में नहर खंगाली गई, लेकिन कुछ पता नहीं चला। शुक्रवार आधी रात पुलिस ने इस कांड का खुलासा करने की जानकारी दी। प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि प्रमोद छह दिसंबर की दोपहर स्कूटी से घर से निकले और गायब हो गए।
उनके घर न आने पर पत्नी मुनमुन राय ने गुमशुदगी दर्ज कराई थी। पुलिस ने उनकी तलाश की लेकिन कुछ पता नहीं चला। छानबीन में प्रमोद के साले के ससुर सीतापुर निवासी व यहां दुबग्गा के पास मधवापुर में रह रहे राधेलाल का नाम सामने आया।
पुलिस ने राधेलाल के बारे में पड़ताल शुरू की तो धीरे-धीरे पूरा मामला खुलता चला गया। प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि राधेलाल और प्रमोद की बुआ के करीबी विनोद ने उसकी संपत्ति हड़पने के लिए अपहरण और हत्या की साजिश रची थी।
राधेलाल और उसका दामाद आशाराम ने बहाने से प्रमोद को अपने साथ नींबू पार्क लाए और ओला कैब में बैठाकर दुबग्गा ले गए। वहां कुछ देर ठहरने के बाद सभी सीतापुर पहुंचे। वहां अलग-अलग रिश्तेदारों के घर पर प्रमोद को बंधक बनाकर रखा गया।
नौ दिसंबर की सुबह प्रमोद को घर भेजने के लिए बस में बैठाने के बहाने ले जाया गया और बिठौली नहर पुल से नीचे फेंक दिया। पुलिस ने 11 दिसंबर को राधेलाल, काजल, कमला बिशुन को व 13 दिसंबर को आसाराम को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था जबकि विनोद ने तीन दिन पहले अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था।
शुक्रवार को गोंडा के उमरीबेगमगंज बनुना निवासी किशन कुमार व विनोद की पत्नी मुन्नीदेवी को भी गिरफ्तार कर लिया। प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि प्रमोद को नहर में कहां से फेंका गया? साजिश में और कौन-कौन लोग शामिल थे? इस बारे में पता लगाने के लिए आरोपियों की पुलिस कस्टडी रिमांड मांगी जाएगी।