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इमरजेंसी से विभाग में भेजने के दौरान उखड़ी बच्चे की सांसें

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बिना ऑक्सीजन सपोर्ट के वार्ड में शिफ्टिंग के दौरान बच्चे की मौत, हंगामा
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बलरामपुर अस्पताल में इमरजेंसी से बाल रोग विभाग में शिफ्ट करते वक्त बच्चे ने दम तोड़ा
बलरामपुर अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती चार साल के मासूम की बिना ऑक्सीजन सपोर्ट वार्ड में शिफ्टिंग के दौरान मौत हो गई। नाराज तीमारदारों ने स्टॉफ पर लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा करना शुरू कर दिया। तीमारदारों का आरोप था कि इमरजेंसी में बच्चा ऑक्सीजन सपोर्ट पर था। वहां से बिना स्ट्रेचर ही मरीज को गोद में उठाकर ले जाने की बात कहकर भेज दिया गया। ऑक्सीजन हटते ही उसकी सांसें उखड़ गईं।
सीतापुर के महमूदाबाद निवासी भागीरथ का बेटे अतुल (4) को बुखार के साथ झटके आने पर शुक्रवार देर रात करीब 12 बजे बलरामपुर अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की देखरेख में उसका उपचार चल रहा था। बच्चा ऑक्सीजन सपोर्ट पर था। दोपहर करीब तीन बजे स्टॉफ ने बच्चे को बाल रोग विभाग में शिफ्ट करने की तैयारी की थी। बिना ऑक्सीजन सिलेंडर व स्ट्रेचर ही मरीज को बाल रोग विभाग के स्टॉफ ने भेज दिया। ऑक्सीजन हटते ही उसकी सांसें उखड़ने लगीं। आनन-फानन तीमारदार उसे लेकर विभाग में पहुंचे थे मगर तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। नर्स ने डॉक्टर को ऑन कॉल बुलाया। डॉक्टर ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
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तीमारदार बिना ऑक्सीजन बच्चे को विभाग में भेजने का आरोप लगाकर हंगामा करने लगे। पिता भागीरथ का आरोप था कि स्टॉफ की लापरवाही से बच्चे की जान चली गई। किसी ने भी बच्चे को ऑक्सीजन सिलेंडर तक नहीं दिया। ऑक्सीजन सपोर्ट न मिलने से बच्चे की मौत हो गई। नाराज तीमारदारों ने काफी देर तक बाल रोग विभाग के बाहर हंगामा भी किया। डॉक्टरों के समझाने पर तीमारदार शव लेकर चले गए।
पांच घंटे इलाज को भटकता रहा था बच्चा
सीतापुर सीएचसी से गंभीर हालत में शुक्रवार शाम मासूम अतुल (4) को लोहिया अस्पताल भेजा गया था। यहां इमरजेंसी में एक घंटे भर्ती रखने के बाद डॉक्टरों ने बच्चे को केजीएमयू ट्रॉमा भेज दिया। ट्रॉमा में तीन घंटे जांच के लिए डॉक्टर दौड़ाते रहे। देर रात करीब 11 बजे उसे बेड खाली न होने का हवाला देकर बलरामपुर अस्पताल भेज दिया गया था।
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आरोप बेबुनियाद हैं
मरीज की शिफ्टिंग के दौरान मौत नहीं हुई है। वार्ड में उसकी मौत हुई है। तीमारदारों के आरोप बेबुनियाद है। बच्चे की हालत काफी नाजुक पहले से थी। इलाज के दौरान उसकी मौत हुई है।
डॉ. राजीव लोचन, निदेशक- बलरामपुर अस्पताल
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