लखनऊ। केजीएमयू के पैथोलॉजी विभाग में अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. चंचल राणा का चयन डॉ. वीआर खानोलकर पुरस्कार के लिए किया गया है। यह पुरस्कार इंडियन एसोसिएशन ऑफ पैथोलॉजिस्ट और माइक्रोबायोलॉजिस्ट की ओर से दिए जाने वाले भारतीय पैथोलॉजी में सर्वोच्च सम्मानों में से है। उड़ीसा में अगले माह होने वाले समारोह में यह पुरस्कार दिया जाएगा। डॉ. चंचल का चयन थायराइड कैंसर के पुनर्वर्गीकरण संबंधित प्रभाव के अध्ययन के लिए हुआ है। उनके शोध के अनुसार कुछ ट्यूमर बहुत कम आक्रामक तरीके से व्यवहार करते हैं। इसका असर यह होगा कि कैंसर के लिए किए जा रहे ओवरट्रीटमेंट से मरीज को बचाया जा सकेगा।
भारत थायरॉइड कैंसर में दुनिया में चौथे और मृत्यु दर में दूसरे स्थान पर है। गर्दन के आधार पर स्थित थायरॉयड ग्रंथि हार्मोन (टी-3 और टी-4) बनाती है। इससे हृदय गति, शरीर का तापमान और पाचन नियंत्रित होता है। हार्मोन मस्तिष्क, मांसपेशियों की गतिविधि और पूरी ऊर्जा संतुलन के लिए जरूरी हैं। इस हॉर्मोन के निष्क्रिय या अति सक्रिय होने से थकान, वजन में बदलाव, व्यवहार में परिवर्तन, अधिक गंभीर हृदय व न्यूरोलॉजिकल समस्याएं पैदा हो सकती हैं। कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने उपलब्धि पर बधाई दी है।